उन्नाव रेप केस: आरोपी विधायक का भाई भी सीबीआई के शिकंजे में, चार दिन की रिमांड पर लिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उन्नाव की रेप पीड़िता के पिता की हत्या मामले में सीबीआई की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सपना त्रिपाठी ने आरोपी अतुल सिंह, सोनू सिंह, बउवा उर्फ वीरेन्द्र सिंह, शैलू सिंह तथा विनीत मिश्रा को चार दिन की कस्टडी रिमांड पर देने का आदेश दिया है। सीबीआई आरोपियों को 18 अप्रैल की प्रात: 10 बजे से चार दिन तक कस्टडी में लेकर पूछताछ कर सकेगी।
इससे पहले सीबीआई ने भाजपा विधायक के भाई अतुल सिंह समेत इन आरोपियों को उन्नाव जेल से लाकर विशेष अदालत में पेश किया। सीबीआई के विवेचक अनिल कुमार मिश्रा की ओर से लोक अभियोजक राम बाबू कनौजिया ने आरोपियों को पांच दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड पर देने की मांग वाली अर्जी दी।
उन्होंने बताया कि वादिनी आशा सिंह ने 4 अप्रैल को उन्नाव के माखी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 3 अप्रैल को दिल्ली में रहने वाले पति सुरेन्द्र सिंह अपने मुकदमे के काम से उन्नाव आए थे। यहां आरोपी सोनू, शैलू, बउवा व विनीत ने उन्हें मारपीट कर घायल कर दिया। पति को बचाने आई पुत्रियों व सास को भी मारा पीटा गया। बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान सुरेन्द्र सिंह की मृत्यु हो गई। इस पर पुलिस ने अतुल समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करके हत्या की धाराएं बढ़ा दीं।
लोक अभियोजक ने बताया कि सीबीआई ने 16 अप्रैल को मामला दर्ज करके विवेचना शुरू की। पता चला कि इस घटना में आरोपियों की विशेष भूमिका है और गहन विवेचना व साक्ष्य जुटाने के लिए इन्हें रिमांड पर देना आवश्यक है। साथ ही आरोपियों को घटनास्थल पर ले जाकर साक्ष्य एकत्र करके साथ ही सीएसएफएल टीम की मौजूदगी में घटना का रिक्रिएशन करके महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि और हथियारों की बरामदगी भी करनी है। घटना में शामिल कई अज्ञात आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। लिहाजा, इनसे पूछताछ जरूरी है।
कस्टडी में नहीं कर सकेंगे प्रताड़ित
कोर्ट ने सीबीआई की अर्जी स्वीकार करते हुए विवेचक को निर्देश दिया कि वह आरोपियों का मेडिकल कराएंगे तथा कस्टडी रिमांड के दौरान शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं करेंगे। वकील चाहें तो निश्चित दूरी बनाकर रह सकते हैं।
जेल कर्मियों से भी होगी पूछताछ
सीबीआई के सूत्रों का कहना है कि सीबीआई की टीम जेल कर्मियों से भी पूछताछ करेगी। क्योंकि आरोप यह भी लग रहे हैं कि आठ अप्रैल को जब पीड़िता ने लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के पास आत्मदाह का प्रयास किया था, उसी दिन जेल में पीड़िता के पिता की दोबारा पिटाई कर दी गई। इस बात में कितनी सच्चाई है, सीबीआई इसका भी पता लगाएगी।
पीड़िता के छह पन्ने के बयान की कोर्ट से कॉपी लेगी सीबीआई
वहीं सोमवार को सीबीआई की विशेष कोर्ट में पीड़िता का बयान दर्ज होने के बाद जल्द ही सीबीआई की टीम न्यायालय से बयान की कॉपी हासिल करेगी। सूत्रों का कहना है कि पीड़िता ने सीबीआई के जज के सामने चार घंटे में छह पन्ने का बयान दर्ज कराया है।
सेंगर के गांव पहुंची सीबीआई ने जुटाए साक्ष्य
(उन्नाव)। भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर दर्ज दुष्कर्म के मामले में सीबीआई की जांच में और तेजी आई है। मंगलवार को आईजी सीबीआई जीके गोस्वामी के नेतृत्व में उन्नाव पहुंची अलग-अलग चार टीमों ने आरोपी विधायक के गांव माखी समेत विभिन्न जगहों पर ताबड़तोड़ तफ्तीश कर घटना से संबंधित साक्ष्य एकत्र किए।
आईजी सीबीआई जीके गोस्वामी व एसपी डॉ. राघवेंद्र वत्स के नेतृत्व में मंगलवार को चार टीमें सुबह 11:12 बजे उन्नाव आईं। सुबह 8:45 बजे सबसे पहले दो सदस्यीय टीम जेल पहुंची और पीड़ित किशोरी के पिता की हत्या के आरोप में जेल में बंद विधायक कुलदीप सिंह के छोटे भाई अतुल सिंह व उनके साथी विनीत मिश्रा, बउवा, शैलू, सोनू को पुलिस सुरक्षा के साथ लखनऊ लेकर चली गई।
उधर, आईजी के साथ सात सदस्यीय टीम सुबह 11:58 बजे माखी थाने पहुंचकर जांच शुरू की। एक तीन सदस्यीय टीम 11:15 बजे निरीक्षण भवन पहुंची यहां रह रही किशोरी व उसके परिवार के लोगों से बातचीत करने के बाद 12:23 बजे किशोरी व उसकी मां को लेकर माखी रवाना हुई। उधर दिल्ली से आई फॉरेंसिक विभाग की छह सदस्यीय टीम सीधे माखी थाने पहुंची। दोपहर 12:50 बजे टीम किशोरी व उसकी मां को लेकर माखी थाने पहुंची।
आईजी व एसपी सीबीआई ने 1:20 बजे तक दोनों से पूछताछ की। दोपहर 1:30 बजे सीबीआई मां-बेटी को उसके घर ले जाकर जांच की और वह घटनास्थल भी देखा जहां किशोरी के पिता से मारपीट की बात बताई जा रही है। इसके बाद टीम मां-बेटी को लेकर विधायक के आवास गए और करीब डेढ़ घंटे तक जांच की। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई अधिकारियों को किशोरी उस कमरे में भी लेकर गई जहां उसने दुष्कर्म की बात बताई है। जांच करने के बाद सीबीआई ने शाम 4 बजे किशोरी व उसकी मां को वापस निरीक्षण भवन पहुंचाया।
जेल अधिकारियों और कर्मचारियों के दर्ज किए गए बयान, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
(उन्नाव)। भाजपा विधायक पर आरोप लगाने वाली किशोरी के पिता की न्यायिक हिरासत में हुई मौत के मामले मजिस्ट्रेटी जांच शुरू हो गई है। जेल अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए हैं। जिला जज ने न्यायिक हिरासत में बंदी की मौत पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से जांच कर 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है।
4 अप्रैल को मारपीट व आर्म्स ऐक्ट में जेल भेजे गए किशोरी (विधायक पर आरोप लगाने वाली) के पिता की जिला कारागार में 8 अप्रैल की रात हालत बिगड़ गई थी। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां 9 अप्रैल की सुबह मौत हो गई थी। किशोरी के पिता की मौत के बाद से घटना सुर्खियों में आ गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मारपीट से पेट में आई चोट में संक्रमण फैलने से मौत होने की पुष्टि हुई थी। न्यायिक हिरासत में बंदी की मौत की घटना की जांच जिला जज विकार अहमद ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को दी थी। जेल अधीक्षक, डिप्टी जेलर सहित अन्य जेल कर्मियों ने न्यायिक मजिस्ट्रेट को अपने बयान दर्ज कराए हैं।
पीड़िता, परिवारीजनों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण
(उन्नाव)। जिला अस्पताल के डॉक्टरों से स्वास्थ्य परीक्षण कराने से इनकार करने वाले पीड़ित किशोरी के परिजनों ने आखिरकार मंगलवार को जिद तोड़ी। मंगलवार को परिजन स्वास्थ्य परीक्षण कराने को राजी हो गए। जिला अस्पताल में तैनात फिजीशियन डॉ. आलोक पांडेय के नेतृत्व में किशोरी व उसके परिजनों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। डॉक्टरों ने किशोरी, उसके चाचा व अन्य महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया। डाक्टरों के अनुसार, परीक्षण में सब कुछ सामान्य मिला है। सभी को पर्याप्त पानी पीने व भोजन करते रहने की सलाह दी गई है।