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बाराबंकी के रामसनेही घाट पर होगी रामायण संग्रहालय और सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना

Sun, 04 Apr 2021 10:04 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 04 Apr 2021 10:04 PM IST
सार

करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये की लागत से 10 एकड़ भूमि पर स्थापित होगा केंद्र  
कठपुतली के माध्यम से होगी रूस, जापान, इंडोनेशिया, मलेशिया व थाईलैंड की रामायण की प्रस्तुति
आईआईटी खड़गपुर तैयार करेगा डीपीआरए, 100 साल की आवश्यकता के अनुरूप बनेगा भवन

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Ramayana Museum and Cultural Center to be established at Ramsanehi Ghat in Barabanki
Ramayan - फोटो : Instagram

विस्तार

अयोध्या और लखनऊ के बीच बाराबंकी के ग्राम भवनियापुर खेवली में रामसनेही घाट पर 10 एकड़ में अंतरराष्ट्रीय रामायण संग्रहालय और सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना की जाएगी। यहां कठपुतली के माध्यम से भारत समेत रूस, जापान, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड की रामायण की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए मधुबनी, अवध, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और श्रीलंका के व्यंजनों वाली रसोई, आवास और पूजा पाठ के लिए प्रभु श्रीराम मंदिर का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने आईआईटी खड़गपुर से इसकी विस्तृत कार्य योजना तैयार कराने की कवायद शुरू की है। संग्रहालय और सांस्कृतिक केंद्र पर करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि रामायण संग्रहालय और सांस्कृतिक केंद्र के लिए लखनऊ-अयोध्या राजमार्ग पर लखनऊ से 54 किमी और अयोध्या से 64 किमी पर करीब 10 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। परिसर में रामायण, कला, संस्कृति हस्तशिल्प, लोक व्यंजन, रामायण विश्व यात्रा वीथिका, राम वन गमन मार्ग, रामायण आधारित कला वीथिका, रामायण आधारित पुस्तकालय, शोध और प्रकाशन केंद्र, रामलीलाओं की प्रस्तुतियां, रामलीला प्रशिक्षण केंद्र के साथ सोवेनियर शाप्स के रूप में भी रामायण की हस्तकला का विशेष केंद्र स्थापित किया जाएगा।
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प्रवक्ता ने बताया कि परिसर में प्रदेश, देश-विदेश के श्रृद्धालु और पर्यटकों के ठहरने की भी व्यवस्था होगी। अल्प विश्राम के दौरान सुबह और शाम सामूहिक भजन की सुविधा होगी। करीब 100 साल की आवश्यकता के अनुसार भवन बनाया जाएगा। 50 वर्ष के लिए मल्टीलेवल पार्किंग की व्यवस्था होगी।
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पहले रामलीला का मंचन होगा शुरू
संस्कृति विभाग के निदेशक शिशिर ने बताया कि डीपीआर आईआईटी खड्गपुर तैयार कर रह रहा है। करीब डेढ़ सौ करोड़ की यह परियोजना दो चरणों में पूरी होगी। अयोध्या शोध संस्थान के संचालन में मंच बनवाकर पहले रामलीला का मंचन और कुछ लोक व्यंजन की शुरुआत की जाएगी।

 

रामायण संग्रहालय व सांस्कृतिक केंद्र की विशेषताएं

रामचरितमानस के सात कांडों के आधार पर अनवरत गायन एवं वीडियो दिखाए जाएंगे।
राम वनगमन मार्ग में राम जानकी और राम वनगमन मार्ग के रूप में 280 स्थलों का वर्चुअल और वीडियो दिखाए जाएंगे।
रामायण आधारित कला वीथिका, लोक चित्रशैली, लघु चित्र शैली और आधुनिक चित्र शैली में रामायण के चित्रों की वीथिका का निर्माण किया जाएगा।
सभी हस्तशिल्प माध्यमों टेराकोटा, कास्ट, धातु, पेपर मैसी, वस्त्र और पत्थर आदि शैलियों में हस्तशिल्प की राज्यवार प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
रामायण आधारित पुस्तकालय, शोध और प्रकाशन केंद्र में भारत और विश्व की सभी भाषाओं में रामायण और अन्य प्रकाशित कार्य प्रदर्शित होंगे।
अयोध्या की पारंपरिक रामलीला की प्रस्तुति नियमित शाम छह बजे से आठ बजे के बीच होगी। रामलीला प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण की व्यवस्था रहेगी।
पंचवटी वन क्षेत्र में रामायणकालीन वृक्षों का आयताकार रूप में अलग-अलग पौधरोपण किया जाएगा।
सोविनियर शाप्स में विशेष रूप से देश-विदेश के पर्यटकों और श्रृद्धालुओं के लिए सोविनियर शाप्स बनाई जाएगी।
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