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अयोध्या: सदियों तक अक्षुण्ण रहेगा रामलला का गर्भगृह, इंजीनियरों ने बनाया मास्टर प्लान

Fri, 03 Jul 2020 05:54 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या Published by: ishwar ashish Updated Fri, 03 Jul 2020 05:54 PM IST
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Ram temple will survive for ages, construction process starts.
अयोध्या का गर्भगृह। - फोटो : amar ujala

श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने की कवायद शुरू हो गई है। इंजीनियर्स की टीम ने सदियों तक अक्षुण्ण रहने वाले भव्य राममंदिर की नींव से लेकर संपूर्ण निर्माण प्रक्रिया की रणनीति बनाई।

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परिसर के निकट ही सरयू नदी को देखते हुए नींव की गहराई मंदिर के क्षेत्रफल व ऊंचाई के अनुपात में होगी। इसे आरसीसी की बीम के बजाए मंदिर की लंबाई-चौड़ाई के दो गुने परिक्षेत्र की गहरी खोदाई करके आरसीसी की एक पर एक पांच फीट मोटी चार से पांच लेयर में तैयार किया जाएगा। जिसे कभी भी नदी की सीधी तेज धारा से लेकर कोई भी बाढ़ या भूकंप मंदिर को हिला न सके।
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अब अंतिम रूप से तय कर लिया है कि राममंदिर का निर्माण विश्व हिंदू परिषद के प्रस्तावित मॉडल पर ही होगा। यह मॉडल गुजरात के प्रख्यात वास्तुविद चंद्रकांत सोमपुरा ने तैयार किया था। मंदिर 128 फिट ऊंचा, 268 फिट लंबा और 140 फिट चौड़ा होगा। मंदिर निर्माण से पूर्व ट्रस्ट की ओर से 70 एकड़ भूमि के समतलीकरण का कार्य चल रहा है।
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इस बीच राममंदिर निर्माण के लिए अधिकृत कंपनी एलएंडटी के वरिष्ठ पांच इंजीनियरों की टीम ने नींव खोदने से पहले जगह-जगह गड्ढे खोदकर मिट्टी की जांच की। इसकी रिपोर्ट आने के बाद गुरुवार को राममंदिर का मास्टर प्लान बनाने वाले मुख्य शिल्पी चंद्रकांत भाई सोमपुरा को अयोध्या आना था, लेकिन उनके अस्वस्थ होने के कारण उनका काम देख रहे उनके पुत्र आशीष सोमपुरा दोपहर करीब 12.30 अयोध्या पहुंचे।

गुजरात से आए शिल्पी ने तमाम प्राचीन मंदिरों की रिपोर्ट साझा की

कारसेवकपुरम में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज, एलएंडटी व पत्थरों की सफाई करने वाली केएलए कंपनी के इंजीनियरों से विचार विमर्श के बाद करीब डेढ़ बजे श्रीरामजन्मभूमि परिसर पहुंचे। यहां अलग-अलग स्थानों के करीब 80 फीट तक गहरे मिट्टी के नमूने की जांच की गई। देखा गया कि भूमि की उपयोगिता क्या है। किस प्रकार से भूमि सुरक्षित है। कितने वर्ष तक मंदिर यहां विराजमान रह सकता है।

गुजरात से आए शिल्पी आशीष सोमपुरा की टीम ने तमाम प्राचीन मंदिरों की रिपोर्ट साझा की। एलएंडटी के इंजीनियरों ने सरयू नदी के कछार से लेकर उसकी धाराएं बार-बार बदलने पर भी राय रखी। इंजीनियरों ने सदियों तक अक्षुण्ण रहने वाले राममंदिर के निर्माण को लेकर डेढ़ एकड़ के प्रस्तावित परिसर के करीब दोगुने आकार में आरसीसी की गहरी नींव बनाने की रणनीति बनाई। इसे पांच से छह लेयर में पांच से आठ फिट मोटा बनाने की बात हुई। इसी नींव पर प्रस्तावित मंदिर मॉडल में तय पत्थर की नींव बनाई जाएगी।

इसके बाद भूतल, प्रथम तल व शिखर का निर्माण होगा। भूकंप रोधी सभी तकनीकी उपाय अपनाए जाएंगे। सरयू की ओर से आने वाली हवाओं का असर मंदिर पर न पड़े, इसके लिए 70 एकड़ भूभाग के चहारदीवारी के पहले तीन लेयर में वृक्षारोपण की भी रणनीति बनाई गई। इंजीनियरों का कहना था कि नींव की खुदाई और तैयार होने में रात दिन चार शिफ्ट में काम होने पर भी छह से सात महीने लगेंगे।

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