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UP: राज्यपाल रामनाईक ने एक और विधेयक भेजा राष्ट्रपति के पास

Sat, 07 May 2016 03:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 07 May 2016 03:04 AM IST
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Ram Naik sends another bill to president house.
राज्यपाल राम नाईक - फोटो : amar ujala

लोकायुक्त के चयन में इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की भूमिका समाप्त किए जाने संबंधी विधेयक को भी राज्यपाल राम नाईक ने राष्ट्रपति के पास विचारार्थ भेज दिया है। इसके साथ ही अब राजभवन में सिर्फ उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2015 ही लंबित रह गया है।

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हालांकि विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजे जाने की जानकारी देने के लिए सीएम को लिखे पत्र में राज्यपाल ने कड़ी टिप्पणी भी की है।
राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त तथा उप लोक आयुक्त (संशोधन) विधेयक 2015 के परीक्षण के बाद कहा है कि राज्य विधान मंडल से पारित संशोधित विधेयक में लोकायुक्त के चयन की प्रक्रिया में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका को समाप्त कर दिया गया है, जबकि केंद्रीय अधिनियम में लोकपाल के चयन में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका महत्वपूर्ण है।
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लोकायुक्त के चयन में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका समाप्त करना केंद्रीय अधिनियम ‘लोकपाल तथा लोक आयुक्त अधिनियम 2013’ की धारा-4 की उपधारा (1) के विरोधाभासी प्रतीत होता है।

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सरकार ने समाप्त कर दी थी चीफ जस्टिस की भूमिका

Ram Naik sends another bill to president house.

इसके मद्देनजर राज्यपाल ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश लोकायुक्त तथा उप लोकायुक्त (संशोधन) विधेयक 2015 को राष्ट्रपति को संदर्भित करने का निर्णय किया है।

गौरतलब है कि मनमाफिक लोकायुक्त की नियुक्ति का रास्ता साफ करने के लिए राज्य सरकार ने पिछले साल 27 अगस्त को विधानमंडल से उ.प्र. लोकायुक्त तथा लोकायुक्त (संशोधन) विधेयक 2015 पास कराकर लोकायुक्त के चयन में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की भूमिका समाप्त कर दी थी।

इस विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी नहीं मिली, तो सरकार ने पुराने कानून के जरिये ही लोकायुक्त के चयन की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन किसी नाम पर सहमति न बन पाने की वजह से नियुक्ति में पेच फंस गया। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और 28 जनवरी 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस संजय मिश्रा की लोकायुक्त के पद पर नियुक्ति कर दी।

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