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'बच्चे भी कहने लगे, सदनों से अच्छे तो हमारे स्कूल'

Mon, 02 Feb 2015 10:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 02 Feb 2015 10:36 AM IST
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Ram naik on Discipline in house.

सदनों में माननीयों के बढ़ते हुल्लड़-हंगामे पर चिंता जताते हुए राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि अब तो बच्चे भी कहने लगे हैं कि सदनों से अच्छा तो उनके स्कूल हैं। जहां ज्यादा अनुशासन है। राज्यपाल रविवार को यहां स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र में बोल रहे थे।

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उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी सहित कुछ पुराने नेताओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए सत्तापक्ष व विपक्ष के रिश्ते समझाए। सदनों को सार्थक बनाने के साथ परिणाम हासिल करने का मंत्र भी दिया। कहा, प्रश्नकाल व शून्यकाल की हत्या नहीं होनी चाहिए।
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नाईक ने कहा कि तीन दिन का बजट सत्र बुलाकर संसदीय परिपाटी को मजबूत करने का सपना देखना ठीक नहीं है। वाजपेयी भी सदस्यों के वेल में आने के विरोधी थे। मुख्य सचेतक होने के नाते मुझे पता है कि जब कोई सदस्य इस बारे में बात करता तो सख्ती से मना कर देते।
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सदनों के सारे कामकाज में सबसे बड़ी समस्या लोगों का बात-बात में सदन के वेल में पहुंच जाना है। तब सुमित्रा महाजन ने उम्मीद जताई कि इस कॉन्फ्रेंस के बाद हुल्लड़-हंगामे पर रोक की दिशा में भी काम आगे बढ़ेगा।

ज्यादा अध्यादेश लाना ठीक नहीं : महाजन

Ram naik on Discipline in house.

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार में ज्यादा अध्यादेश लाना ठीक नहीं है। अध्यादेश जितने कम से कम लाए जाएं, उतना अच्छा माना जाता है। हालांकि जनता के दबाव में तुरंत फैसले लेने केलिए सरकार को अध्यादेश लाने पड़ते हैं।

पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के समापन के बाद रविवार को पत्रकारों से सुमित्रा महाजन ने कहा कि चुनी हुई सरकार से लोग तुरंत रिजल्ट चाहने लगते हैं। सौ दिन और छह माह में रिपोर्ट कार्ड देने की बातें होने लगी हैं।

ऐसे में सरकारों के लिए तुरंत निर्णय लेने जरूरी होते हैं। यदि कुछ कारणों से संसद में बिल पारित नहीं हो पा रहा है तो अध्यादेश लाना पड़ता है। उन्होंने कहा, अध्यादेश कम समय के लिए होता है। उसे सदन में लाकर कानून का स्वरूप देना पड़ता है।

एक सवाल के जवाब में महाजन ने कहा कि विपक्ष का नेता तय होना और सशक्त विपक्ष होना दोनों अलग-अलग बातें हैं। बिलों पर जागरूकता, प्रभावी चर्चा, उसमें संशोधन पेश करना, सरकार की मनमानी पर रोक लगाना सशक्त विपक्ष का काम है। इसके लिए हर दल के नेता की पहले से व्यवस्था है। नेता विरोधी दल के लिए नियम बने हुए हैं।

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