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क्या होता है और कैसे बनता है टाइम कैप्सूल, क्या राम मंदिर में जमीन के 200 फीट नीचे दबाया जाएगा इसे?
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क्या होता है टाइम कैप्सूल?
- फोटो : अमर उजाला
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राम मंदिर के गर्भ गृह में जमीन के 200 फीट नीचे इतिहास को सुरक्षित रखने की खबरें आने के बाद से देश भर में टाइम कैप्सूल की चर्चा हो रही है। हर कोई इस टाइम कैप्सूल को लेकर उत्साहित है और इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा बातें जानना चाह रहा है।
यहां हम आपको बता रहे हैं क्या होता है टाइम कैप्सूल और क्या सच में अयोध्या में जमीन के 200 फीट नीचे इसे दबाया जाएगा? आगे पढ़िए इससे पहले देश में कब किया गया था टाइम कैप्सूल का प्रयोग-
क्या होता है टाइम कैप्सूल?
टाइम कैप्सूल एक कंटेनर की तरह होता है जिसे विशिष्ट सामग्रियों से तैयार किया जाता है। टाइम कैप्सूल हर तरह के मौसम का सामना करने में सक्षम होता है, उसे जमीन के अंदर काफी गहराई में दफनाया जाता है।
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काफी गहराई में होने के बावजूद भी हजारों वर्षों तक न तो उसे कोई नुकसान पहुंचता है और न ही वह सड़ता-गलता है। धरती के अंदर तमाम उथल-पुथल को झेलने के बावजूद इसमें जंग तक नहीं लगती।
टाइम कैप्सूल एक कंटेनर की तरह दिखता है जिसे विशेष प्रकार के तांबे (कॉपर) से बनाया जाता है और इसकी लंबाई करीब तीन फुट होती है। इस तांबे की विशेषता यह होती है कि यह सालों साल खराब नही होता है और सैकड़ों हजारों साल बाद भी इसे जब जमीन से निकाला जाएगा तो इसमें मौजूद सभी दस्तावेज पूरी तरह से सुरक्षित होंगे।
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यहां हम आपको बता रहे हैं क्या होता है टाइम कैप्सूल और क्या सच में अयोध्या में जमीन के 200 फीट नीचे इसे दबाया जाएगा? आगे पढ़िए इससे पहले देश में कब किया गया था टाइम कैप्सूल का प्रयोग-
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क्या होता है टाइम कैप्सूल?
टाइम कैप्सूल एक कंटेनर की तरह होता है जिसे विशिष्ट सामग्रियों से तैयार किया जाता है। टाइम कैप्सूल हर तरह के मौसम का सामना करने में सक्षम होता है, उसे जमीन के अंदर काफी गहराई में दफनाया जाता है।
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काफी गहराई में होने के बावजूद भी हजारों वर्षों तक न तो उसे कोई नुकसान पहुंचता है और न ही वह सड़ता-गलता है। धरती के अंदर तमाम उथल-पुथल को झेलने के बावजूद इसमें जंग तक नहीं लगती।
टाइम कैप्सूल एक कंटेनर की तरह दिखता है जिसे विशेष प्रकार के तांबे (कॉपर) से बनाया जाता है और इसकी लंबाई करीब तीन फुट होती है। इस तांबे की विशेषता यह होती है कि यह सालों साल खराब नही होता है और सैकड़ों हजारों साल बाद भी इसे जब जमीन से निकाला जाएगा तो इसमें मौजूद सभी दस्तावेज पूरी तरह से सुरक्षित होंगे।
2017 में मिला था अब तक का सबसे पुराना टाइम कैप्सूल
30 नवंबर, 2017 में स्पेन के बर्गोस में करीब 400 साल पुराना टाइम कैप्सूल मिला था। यह यीशू मसीह की मूर्ति के आकार का था। मूर्ति के अंदर एक दस्तावेज था जिसमें 1777 के आसपास की आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सूचनाएं थीं। अब तक इसे ही सबसे पुराना टाइम कैप्सूल माना जाता है। अब तक इससे पुराना कोई टाइम कैप्सूल नहीं मिला है।
टाइम कैप्सूल क्यों दफनाया जाता है?
टाइम कैप्सूल को दफना कर किसी समाज, काल, संस्कृति के इतिहास को सुरक्षित रखा जाता है। एक तरह से ऐसा करके वर्तमान युग के मनुष्य भविष्य के लिए संदेश छोड़ते हैं। ताकि आने वाली पीढ़ी पिछले समय के सही इतिहास को जान पाए।
प्रधानमंत्री मोदी पर लगे हैं टाइम कैप्सूल दफनाने के आरोप
प्रधानमंत्री मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो साल 2011 में उनपर विपक्ष ने टाइम कैप्सूल दफनाने का आरोप लगाया था। विपक्ष का कहना था कि गांधीनगर में निर्मित महात्मा मंदिर के नीचे टाइम कैप्सूल दफनाया गया है जिसमें मोदी ने अपनी उपलब्धियों का बखान किया है।
इंदिरा गांधी ने भी दफनाया था टाइम कैप्सूल
अगर राम मंदर के नीचे टाइम कैप्सूल को दफनाया जाता है, तो देश में यह कोई पहला मामला नहीं होगा। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पहले ही ऐसा कर चुकी हैं। दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रोफेसर आनंद रंगनाथन ने एक पुरानी तस्वीर ट्वीट कर यह जानकारी दी।
इंदिरा गांधी ने 15 अगस्त, 1973 को लालकिले के पास जमीन में एक टाइम कैप्सूल दफनाया था। इसके बाद 1977 में कांग्रेस ने सत्ता गंवाई और तत्कालीन पीएम मोरारजी देसाई ने जमीन खोदकर उसे निकलवा दिया।
हालांकि इस बात का पता अब तक नहीं चल सका है कि उसमें क्या साक्ष्य थे और क्या जानकारियां थीं, जिसे सहेजा गया था।
टाइम कैप्सूल क्यों दफनाया जाता है?
टाइम कैप्सूल को दफना कर किसी समाज, काल, संस्कृति के इतिहास को सुरक्षित रखा जाता है। एक तरह से ऐसा करके वर्तमान युग के मनुष्य भविष्य के लिए संदेश छोड़ते हैं। ताकि आने वाली पीढ़ी पिछले समय के सही इतिहास को जान पाए।
प्रधानमंत्री मोदी पर लगे हैं टाइम कैप्सूल दफनाने के आरोप
प्रधानमंत्री मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो साल 2011 में उनपर विपक्ष ने टाइम कैप्सूल दफनाने का आरोप लगाया था। विपक्ष का कहना था कि गांधीनगर में निर्मित महात्मा मंदिर के नीचे टाइम कैप्सूल दफनाया गया है जिसमें मोदी ने अपनी उपलब्धियों का बखान किया है।
इंदिरा गांधी ने भी दफनाया था टाइम कैप्सूल
अगर राम मंदर के नीचे टाइम कैप्सूल को दफनाया जाता है, तो देश में यह कोई पहला मामला नहीं होगा। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पहले ही ऐसा कर चुकी हैं। दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रोफेसर आनंद रंगनाथन ने एक पुरानी तस्वीर ट्वीट कर यह जानकारी दी।
इंदिरा गांधी ने 15 अगस्त, 1973 को लालकिले के पास जमीन में एक टाइम कैप्सूल दफनाया था। इसके बाद 1977 में कांग्रेस ने सत्ता गंवाई और तत्कालीन पीएम मोरारजी देसाई ने जमीन खोदकर उसे निकलवा दिया।
हालांकि इस बात का पता अब तक नहीं चल सका है कि उसमें क्या साक्ष्य थे और क्या जानकारियां थीं, जिसे सहेजा गया था।
क्या सच में राम मंदिर के गर्भगृह के नीचे दफनाया जाएगा टाइम कैप्सूल?
दरअसल राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल के बयान के बाद से ही देश भर में टाइम कैप्सूल की चर्चा ने जोर पकड़ी। उन्होंने कहा था कि मंदिर के गर्भ गृह के 200 फीट नीचे इतिहास को सुरक्षित करने के लिए टाइम कैप्सूल रखा जाएगा।
उन्होंने बताया था कि राम जन्मभूमि का रास्ता 500 वर्षों तक कई अड़चनों का सामना करने और कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने के बाद साफ हुआ, इसलिए भविष्य में मंदिर के इतिहास को लेकर किसी तरह के विवाद से बचने के लिए टाइम कैप्सूल दफनाने का निर्णय लिया गया है।
हालांकि सुर्खियों में आने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इसका सिरे से खंडन कर दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि टाइम कैप्सूल की खबरें निराधार हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
उन्होंने बताया था कि राम जन्मभूमि का रास्ता 500 वर्षों तक कई अड़चनों का सामना करने और कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने के बाद साफ हुआ, इसलिए भविष्य में मंदिर के इतिहास को लेकर किसी तरह के विवाद से बचने के लिए टाइम कैप्सूल दफनाने का निर्णय लिया गया है।
हालांकि सुर्खियों में आने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इसका सिरे से खंडन कर दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि टाइम कैप्सूल की खबरें निराधार हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।