राज्य कर्मचारी महासंघ का आरोप: वाणिज्य कर विभाग में 3000 पद समाप्त करने की साजिश
अखिल भारतीय राज्य कर्मचारी चतुर्थ श्रेणी महासंघ ने कहा है कि वाणिज्य कर विभाग में काडर रिव्यू करने से कर्मचारियों की तुलना में अफसरों की संख्या अधिक हो जाएगी और कर चोरी को बढ़ावा मिलेगा।
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वाणिज्यकर विभाग के काडर रिव्यू के प्रस्ताव पर अखिल भारतीय राज्य कर्मचारी चतुर्थ श्रेणी महासंघ ने आपत्ति जताई है। महासंघ का कहना है कि अगर प्रस्ताव के आधार पर काडर रिव्यू को मंजूरी दी गई तो विभाग में कर्मचारियों के करीब 3000 पद समाप्त हो जाएंगे।
महासंघ ने इसे साजिश बताते हुए कहा कि इससे कर्मचारियों की तुलना में अधिकारियों की संख्या अधिक हो जाएगी। महासंघ ने इस मामले में मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए अधिकारियों के प्रस्ताव की जांच कराने और आईआईएम से तैयार काडर रिव्यू के प्रस्ताव को मंजूरी देने की मांग की है।
महासंघ के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी सुरेश यादव ने कहा कि विभाग के कुछ अधिकारियों ने कर चोरी करने वाले कुछ बड़े व्यापारियों से मिलकर काडर रिव्यू का ऐसा प्रस्ताव तैयार किया है कि कर्मचारियों की संख्या कम हो जाएगी, तो कर चोरी को बढ़ावा देना आसान हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद विभाग ने आईआईएम से काडर रिव्यू का प्रस्ताव तैयार कराया था। इसके लिए सरकारी खजाने से आईआईएम को 58 लाख रुपये का भुगतान भी किया गया था। लेकिन आईआईएम की रिपोर्ट में बदलाव करके विभाग के अधिकारियों ने नया प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजा है, जिसमें तमाम पदों को समाप्त करके सबको टैक्स ऑडिट में समायोजित करने का प्रस्ताव है। ऐसे में प्रश्न यह उठता है जब अभी टैक्स ऑडिट में पर्याप्त कर्मचारी अधिकारी कार्य के अनुपात में तैनात हैं तो बाकी मर्ज कर्मचारियों से क्या काम लिया जाएगा।
ये पद हो जाएंगे समाप्त
उन्होंने कहा अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो विभाग में चतुर्थ श्रेणी, वाहन चालक, कनिष्ठ सहायक, वाणिज्य कर अधिकारी के स्टेनो और पल्लेदारों के पद समाप्त हो जाएंगे। विभाग की सचल दल इकाई को खत्म करना भी विभाग के लिए अहितकारी साबित होगा। ऐसे में कर चोरी करने वाले माफिया निरंकुश हो जाएंगे।