योग के बाद मिला 'मौका' नहीं चूके गृहमंत्री राजनाथ
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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को यहां संतुलन का योग भी साधा।
यहां बाबू स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे सिंह ने कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया तो उनकी प्रारंभिक बातों से ही साफ हो गया कि शायद उनके मन-मस्तिष्क में कहीं न कहीं योग पर विरोध के सवाल भी कौंध रहे हैं।
इसलिए जब उन्हें स्टेडियम में भीड़ दिखी और उसमें कुछ मुस्लिम चेहरे भी नजर आए तो उन्हें लगा कि योग पर सवालों का जवाब देने के लिए इससे उपयुक्त अवसर दूसरा नहीं हो सकता।
उन्होंने पहले यह बताना जरूरी समझा कि योग को किसी धर्म, मजहब या संस्कृति से जोड़ना ठीक नहीं। यह तो भारतीय संस्कृति की विरासत का हिस्सा है जिसमें मुस्लिम, ईसाई, यहूदी और पारसी भी शामिल हैं।
हर किसी को क्रेडिट दिया
उनकी इस बात पर जब मैदान में बैठे अनवार और मो. इब्राहिम जैसे लोगों की हथेली भी ताली बजाने को उठी तो लगा कि राजनाथ की बात कहीं न कहीं योग करने आए लोगों के दिल में उतर रही है।
इससे राजनाथ का हौसला बढ़ा और उन्होंने बात आगे बढ़ाई। आलोचना तो किसी की नहीं की लेकिन इस्लाम से लेकर पारसियों तक को उन्होंने जिस तरह भारतीय संस्कृति की विरासत से जोड़ा, उससे साफ हो गया कि वह इन वर्गों को यह समझाना चाहते हैं कि दुनिया के 190 से ज्यादा देशों में अगर योग पहुंचा तो वह इस देश के किसी एक धर्म या पंथ की उपलब्धि नहीं है। इसका श्रेय देश में रहने वाले सभी लोगों को है।