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जरूरी खबर: ऑटोमेटिक निरस्त टिकटों से रेलवे हर साल कमा रहा 118 करोड़ रुपये, जानें- ये है पूरा खेल

Mon, 04 Apr 2022 04:42 PM IST
लखनऊ ब्यूरो नीरज 'अम्बुज', अमर उजाला, लखनऊ
नीरज 'अम्बुज', अमर उजाला, लखनऊ Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Mon, 04 Apr 2022 04:42 PM IST
सार

यात्रियों को रेलवे प्रशासन सीटों की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक वेटिंग के टिकट जारी करता है और ऑटोमेटिक निरस्त कर रुपये चार्ज किए जाते हैं।

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Railway earns 118 crore per year by automatic canceling of ticket.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

लखनऊ मेल व पुष्पक एक्सप्रेस के मामले यह बताने के लिए काफी हैं कि सीटों की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक वेटिंग के टिकट जारी किए जाते हैं, जिसमें दस प्रतिशत टिकट भी कन्फर्म नहीं होते हैं। वेटिंग के ये टिकट ऑटोमेटिक निरस्त हो जाते हैं। इससे अकेले लखनऊ में रेलवे को सालाना 118 करोड़ रुपये की कमाई हो रही है।

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कोविड के पहले करीब 240 ट्रेनें लखनऊ से आती-जाती हैं। इसमें लखनऊ से ही बनकर चलने वाली लखनऊ मेल, पुष्पक, शताब्दी, एसी एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनें भी हैं। रेलवे बोर्ड के एक अफसर ने बताया कि गर्मी की छुट्टियां हों या त्यौहार, पीक सीजन हो या फिर परीक्षाएं, ट्रेनों में वेटिंग का आंकड़ा सामान्य से कहीं अधिक बढ़ जाता है। पुष्पक में स्लीपर की वेटिंग 400 तक पहुंच जाती है, जबकि लखनऊ मेल व अन्य ट्रेनों में भी वेटिंग सैकड़ों में पहुंचती है। कन्फर्म टिकटों की मारामारी से वेटिंग यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है। सिर्फ लखनऊ में ही करीब ढाई लाख सीटों के एवज में 40 प्रतिशत तक वेटिंग टिकट पीक सीजन में ऑटोमेटिक निरस्त हो जाते हैं। ऐसे हर टिकट पर 60 रुपये काटकर शेष रकम रेलवे रिफंड करता है। इस पर जीएसटी भी लगाता है।
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1.97 करोड़ टिकट सालाना होते हैं निरस्त
रेलवे बोर्ड अधिकारी ने आगे बताया कि लखनऊ से 240 ट्रेनों का आना-जाना होता है, इसमें साप्ताहिक व द्विसाप्ताहिक ट्रेनें भी हैं। ऐसे में 180 ट्रेनें रोज आती-जाती हैं, जिसमें औसतन 300 टिकट प्रति ट्रेन निरस्त होते हैं। इस लिहाज से सालाना 1,97,10,000 टिकट ऑटोमेटिक निरस्त हो रहे हैं, जिनसे रेलवे 60 रुपये के हिसाब से 118 करोड़ रुपये की आमदनी कर रहा है। यह आमदनी पीक सीजन में और भी अधिक रहती है। यही नहीं, प्रदेश में ऑटोमेटिकट निरस्त होने वाले टिकटों से रेलवे हर साल दो हजार करोड़ रुपये तक राजस्व प्राप्त करता है।
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रेल मंत्रालय के समक्ष उठाएंगे मुद्दा
दैनिक यात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल ने आरोप लगाया कि रेलवे प्रशासन जानबूझकर 50 प्रतिशत से अधिक वेटिंग ओपेन करती है। रेलवे को यह लूट रोकनी चाहिए। बताया कि इस मामले को रेल मंत्रालय के समक्ष उठाया जाएगा।

यात्री बोले, ऑटोमेटिक कैंसिलेशन पर चार्ज है लूट
पैसेंजर तृप्ति भारती की शिकायत है कि अगर टिकट पैसेंजर निरस्त करवाता है तो चार्ज लिया जाना वाजिब है, लेकिन ऑटोमेटिक निरस्त होने वाले टिकटों पर यात्रियों को फुल रिफंड दिया जाना चाहिए। पैसेंजर अनुज सिंह ने बताया कि सुविधाएं मयस्सर नहीं और कटौती जारी है।


इतना है निरस्तीकरण शुल्क
एसी टिकट कन्फर्म टिकट निरस्त करवाने पर रेलवे फर्स्ट, सेकेंड, थर्ड एसी में 240, 200 व 180 रुपये काटता है। स्लीपर में 120 रुपये की कटौती होती है, लेकिन वेटिंग या आरएसी टिकट होने पर कैंसिलेशन चार्ज फ्लैट 60 रुपये है। जीएसटी लगने के बाद यह 65 रुपये तक पहुंच जाता है।

केस- 1: लखनऊ मेल
श्रेणी सीटों की संख्या वेटिंग
स्लीपर 560 320
थर्ड एसी 288 140
सेकंड एसी 208 80
फर्स्ट एसी 24 10
कुल 1,080 550

केस- 2: पुष्पक एक्सप्रेस
श्रेणी सीटों की संख्या वेटिंग
स्लीपर 400 350
थर्ड एसी 504 150
सेकंड एसी 104 70
फर्स्ट एसी 24 15
जनरल 200 150
कुल 1,232 735 (नोट: वेटिंग का यह आंकड़ा पीक या फेस्टिवल सीजन में रहता है।)

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