लखनऊ के ब्लड बैंकों पर पड़ा छापा, हड़कंप
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राजधानी लखनऊ के निजी ब्लड बैंकों के खिलाफ शनिवार को एफएसडीए के अभियान ने हड़कंप मचा दिया। कोहली ब्लड बैंक में गड़बड़ी उजागर होने के बाद अचानक जागे अधिकारियों ने एक साथ तीन बैंकों में कार्रवाई की।
इसका नतीजा ये हुआ कि शहर के अलग-अलग नर्सिंग होम और अस्पतालों में हड़कंप मच गया। बाहर से ब्लड बैंक शांत दिखे लेकिन अंदर हो रही जांच ने वहां हो रही गड़बड़ियों का खुलासा कर दिया।
दोपहर बाद ड्रग कंट्रोलर एके मल्होत्रा के निर्देश पर ड्रग इंस्पेक्टर की तीन टीमों को अलग-अलग ब्लड बैंकों में जांच के लिए भेज दिया गया था। लगभग एक साथ ही सभी जगहों पर पहुंचे ड्रग इंस्पेक्टर्स ने ब्लड बैंक प्रशासन से संपर्क किया।
शेखर अस्पताल में डॉक्टर से सवाल-जवाब
दो बजे के आस-पास शेखर अस्पताल पहुंचे ड्रग इंस्पेक्टर ने पांचवें तल पर स्थित ब्लड बैंक का निरीक्षण शुरू किया। 100 से अधिक सवाल-जवाब उन्होंने ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, डॉ. मधु सहित वहां मौजूद स्टाफ से किया।
रक्तदान करने वालों को ब्लीड कैसे कराते हैं, सैंपल लेने के बाद क्या स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर है, खराब रक्त को नष्ट करने का क्या तरीका है, खून को नष्ट करने की जगह कहां बनाई है, ऐसे ही 100 से अधिक सवाल-जवाब स्टाफ से किए गए।
पूछे गए ये सवाल
इस दौरान पूरा स्टाफ वहां मौजूद रहा। सवालों के बीच-बीच में ड्रग इंस्पेक्टर ने ब्लड बैंक का निरीक्षण भी किया। देर शाम तक ब्लड बैंक से जुड़े दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर, कंपोनेंट रजिस्टर, एफरेसिस मशीन, स्टाफ की शैक्षिक योग्यता और अनुभव के बारे में जानकारी ली गई।
फहमीना अस्पताल और इंदिरा डायग्नोस्टिक में छह घंटे जांच
फहमीना अस्पताल और इंदिरा डायग्नोस्टिक सेंटर में भी अधिकारियों ने छह घंटे से अधिक समय तक जांच-पड़ताल की।
इस दौरान किसी को भी ब्लड बैंक में आने-जाने पर रोक लगा दी गई। किसी भी ब्लड बैंक में ब्लड बैग को हॉस्पिटल तक ले जाने केलिए विशेष डिब्बे की व्यवस्था भी नहीं मिली। यही नहीं गोमती नगर, अलीगंज में स्थित निजी ब्लड बैंकों में भी सन्नाटा छाया रहा।
प्रदेश में ब्लड बैंक
कुल संख्या--248
निजी--144
सरकारी--77
मेडिकल कॉलेज--14
मिलिट्री हॉस्पिटल--08