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दंगा पीड़ितों ने छोड़ी अखिलेश सरकार से उम्मीद

Mon, 23 Dec 2013 10:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शामली
ब्यूरो/अमर उजाला, शामली Updated Mon, 23 Dec 2013 10:40 AM IST
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rahul visit to muzaffarnagar

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी राहत शिविरों में पहुंचकर शरणार्थियों के दुख दर्द को बांटा।

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अपनी पीड़ा सुनाते हुए शरणार्थियों ने राहुल गांधी से कहा कि यूपी सरकार से तो अब हमें कोई उम्मीद ही नहीं रही, अब तुम ही कुछ कर दो।

शरणार्थियों ने सूबे की सरकार पर उपेक्षा का लगाते हुए केंद्र से मदद मांगी।

रविवार को राहुल गांधी मलकपुर, बरनावी, खुरगान, दभेड़ी खुर्द सहित कई शिविरों का दौरा किया। सभी जगह शरणार्थियों ने प्रशासन और सरकार पर अपना गुस्सा उतारा।

मलकपुर राहत शिविर में लांक के अनीस, शकीला ने बताया कि उनके गांव में मारकाट मचती रही, लेकिन घंटों बाद भी उन्हें बचाने को पुलिस नहीं पहुंची।

खुरगान में शकील, आबिद, फरजाना आदि कई महिलाओं ने आरोप लगाए कि उनके शिविर में कोई सरकारी मदद नहीं मिल रही, उनके शिविर का तो सरकारी कागजों में नाम तक नहीं है।
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बरनावी के शिविर में भौराकलां के बिन्ना, भगवानपुर की कुलमिजरा, हारुन, सलमा समेत कई शरणार्थियों ने कहा कि जो भी अफसर यहां आता है, वह बस अपने घर लौट जाने की बात कहता है।
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उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया जाता है। यदि पहले ही समय रहते उनकी सुरक्षा कर ली जाती, तो आज उन्हें यहां खुले में नहीं रहना पड़ता। उन्होंने अपनी आंखों के सामने जो मारकाट देखी है, वह याद कर आज भी बच्चे डरते हैं।

दभेढ़ी खुर्द में भी शरणार्थियों ने अपनी पीड़ा राहुल गांधी को सुनाते हुए प्रशासन पर मदद नहीं करने का आरोप लगाया।

मलक पुरा मदरसे के संचालक गुलशाद ने 30 और दभेड़ी खुर्द संचालकों ने शिविर में छह मौत होने की जानकारी राहुल को दी।

इन लोगों ने आरोप लगाया कि यदि शिविरों में पहले से चिकित्सा सुविधा होती, तो इतनी मौत नहीं होती।

शरणार्थी और शिविर संचालकों ने कहा कि अफसर शिविरों में हुई मौत मानने को ही तैयार ही नहीं हैं। अधिकारी केवल शिविर में मरने वालों के कागजी प्रमाण-डॉक्टरी पर्चे दिखाने को कहते हैं।

उनसे कहा जाता है कि जब तुम्हारे गांव में दंगे नहीं हुए, कोई मरा नहीं, तो लौट जाओ। पीड़ितों ने राहुल से पूछा कि क्या जहां लोग मरते हैं, केवल वहीं हिंसा मानी जाता है?

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने मदद के नाम पर उन्हें कुछ नहीं दिया। परिवार में छह-छह लोग हैं, लेकिन कंबल एक है।

कुछ दिन तक दूध दिया वह भी बीच में बंद कर दिया। बरनावी में शिविर संचालकों ने कहा कि वन विभाग की जमीन है, यदि इस जमीन को ही सरकार शरणार्थियों को रहने के लिए दे दें, तो उनके परिवार यहां बस जाएंगे, लेकिन सरकार नहीं मान रही।


गांव प्रधान ने एमएलसी की जमीन देने को कहा है, लेकिन प्रशासन और सरकार चुप है। इसलिए इस सरकार तो उन्हें कोई उम्मीद नहीं रही।

उन्होंने राहुल से कहा कि वही केंद्र से उनकी कुछ मदद करा दें। इस पर राहुल से उन्हें भरोसा दिया कि वह उनकी तकलीफ जानने आए हैं। प्रदेश सरकार को भी इस तरफ ध्यान देना चाहिए। वह भी अपने स्तर से उनकी हर संभव मदद कराएंगे।

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