हार से सहमे राहुल, अभियान से पहले टेकेंगे माथा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विधानसभा चुनाव में हार सहमे राहुल गांधी ने यूपी में सियासी अभियान की शुरुआत करने से पहले ईश्वर की शरण में जाने का फैसला किया है।
राहुल 28 फरवरी को बाराबंकी के देवां शरीफ में मत्था टेककर चादर चढ़ाएंगे। 1 मार्च को राहुल बनारस जाएंगे। वहां बाबा विश्वनाथ मंदिर में जाकर आशीर्वाद लेंगे।
राहुल गांधी 28 फरवरी को राजधानी पहुंच रहे हैं। वे यहां पर सबसे पहले होटल पिकैडली में अखबारों के संपादकों व वरिष्ठ पत्रकारों से मुलाकात करेंगे।
हालांकि, यह तय नहीं हो पा रहा है कि राहुल का यह फैसला महज सियासी चाल है या फिर वाकई उन्हें ईश्वरीय शक्ति की दरकार है।
शहीद पथ पर होगा राहुल का स्वागत
लखनऊ में पत्रकारों से मुखातिब होने से पहले राहुल गांधी शहीद पथ से होते हुए चिनहट पहुंचेंगे। शहीद पथ में पांच-छह स्थानों पर कार्यकर्ता राहुल का स्वागत करेंगे।
इसके बाद वे चिनहट में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों व सहायिकाओं से बातचीत करेंगे। राहुल गांधी यह जानने का प्रयास करेंगे कि आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को किस तरह की दिक्कतें आ रही हैं। इसमें करीब 500 महिलाएं शामिल होंगी।
इसके बाद राहुल गांधी सूफी संत हजरत वारिश अली शाह की दरगाह देवां शरीफ जाएंगे।
यहां पर वे चादर चढ़ाकर आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन के लिए दुआ मांगेंगे।
यहां नेहरू ने भी चढ़ाई थी चादर
इससे पहले जवाहर लाल नेहरू ने भी यहां चादर चढ़ाई थी। देवां शरीफ के दर्शन के बाद बाराबंकी से सफेदाबाद तक राहुल गांधी कई जगह जनसंपर्क भी करेंगे।
अगले दिन यानी एक मार्च को राहुल गांधी बनारस जाएंगे। वहां पर बाबा विश्वनाथ के दर्शन करेंगे। इसके बाद रिक्शे वालों के साथ एक बैठक करेंगे।
राहुल इनसे भी जानने का प्रयास करेंगे कि क्या दिक्कतें हैं। वहां सद्भावना यात्रा में भी राहुल शामिल होंगे। मिर्जापुर में कांग्रेस की जनसभा को भी राहुल संबोधित करेंगे।
हार से हैं परेशान, यूपी से ही उम्मीद
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस वक्त राहुल गांधी बेहद तनाव में हैं और राजस्थान, झारखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मिली करारी शिकस्त से उनका मनोबल भी काफी कम हुआ है।
राहुल को प्रोजेक्ट करने के बावजूद कांग्रेस को मिल रही हार का ही नतीजा है कि राहुल गांधी को अब ईश्वर की शरण में जाना पड़ रहा है। अब यूपी ही उनकी उम्मीद है।
हालांकि, कुछ लोग इसे सियासी पैंतरा भर मान रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो राहुल गांधी हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों को यह जताना चाहते हैं कि कांग्रेस का नेता सेक्यूलर है।
इस पैंतरे या डर का असर कितना होता है, यह तो वक्त ही बताएगा।