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लोहिया संस्थानः हॉस्टल में जूनियरों को बना रहे मुर्गा, कतार में चलते हैं तीसरा बटन देखकर

Sat, 09 Nov 2019 02:27 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 09 Nov 2019 02:27 PM IST
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ragging in lohia sansthan in lucknow
प्रतीकात्मक तस्वीर

लखनऊ के लोहिया संस्थान में एक बार फिर रैगिंग का मामला सामने आया है। हॉस्टल में सीनियरों की प्रताड़ना से तंग आकर जूनियर छात्रों ने एंटी रैगिंग सेल में दो शिकायत दर्ज कराई है। आरोप लगाया कि पहले सीनियर के फरमान पर सभी एमबीबीएस छात्रों ने जीरो मशीन से बाल कटवाए। अब रात होते ही सीनियर हॉस्टल में घुस आते हैं और छात्रों को मुर्गा बनाते हैं।

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उधर, संस्थान प्रशासन सख्ती कार्रवाई के बजाय फजीहत से बचने को मामला दबाने में जुटा है। प्रवक्ता ने कहा, दो शिकायतें आई हैं, पर कोई गंभीर मामला नहीं है। जांच कराई जा रही है। उधर, लोहिया संस्थान में बनी एंटी रैगिंग सेल ये घटनाएं रोकने में नाकाम है। लोहिया संस्थान में एमबीबीएस फर्स्ट ईयर बैच में करीब 200 छात्र हैं।
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आधी रात से शुरू हो जाती है हॉस्टल में रैगिंग
छात्रों ने शिकायत में बताया कि आधी रात को सीनियर हॉस्टल में जूनियर छात्रों के कमरों में घुस आते हैं। आरोप लगाया कि छात्रों को मुर्गा बनाकर तरह-तरह की आवाजें निकलवाई जाती है। गाना व डांस तक कराया जाता है। छात्रों ने बताया कि सीनियर की वजह से उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

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सुरक्षा दावों की भी खुली पोल

...और संस्थान देता रहा अनुशासन का हवाला

लोहिया संस्थान में एमबीबीएस फर्स्ट ईयर के छात्रों के बाल जीरो मशीन से कटने का मामला सितंबर में उठा था। हालांकि, एंटी रैगिंग सेल कार्रवाई करने के बजाए अनुशासन का हवाला देकर मामले को दबा गई। इससे सीनियर छात्रों का दुस्साहस बढ़ गया। अब वे जूनियर छात्रों को और परेशान कर रहे हैं।

संस्थान में रैगिंग रोकने के लिए प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं को हॉस्टल में सुरक्षा देने का दावा किया जाता है। सीनियर छात्रों के हॉस्टल आने-जाने पर पाबंदी है। सुरक्षाकर्मियों की निगरानी में छात्र हॉस्टल से क्लास तक जाते हैं। कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। हालांकि, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के दावों के बावजूद रैगिंग पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

कार्रवाई न होने से सहमे हैं छात्र

रैगिंग रोकने के लिए संस्थान में प्रॉक्टोरियल बोर्ड है। इसके कुछ सदस्यों को छोड़ बाकी अफ सर हाथ पर हाथ धरे रहते हैं। ऐसे में सीनियरों पर कार्रवाई न होने से जूनियर छात्र सहमे हैं। अब वे अपने घर फोन कर मामले की जानकारी दे रहे हैं।

तीसरा बटन देखकर कतार में चलते हैं
कैंपस में नए बैच के छात्र तीसरा बटन देखते हुए कतार बनाकर चलते हैं। बहुत कम छात्र हैं जो गर्दन ऊपर करके चलते हैं।

एंटी रैगिंग सेल में दो शिकायतें आई हैं। हालांकि, इनमें से कोई गंभीर नहीं है। सीनियर छात्रों के गलत शब्दों का चयन करने की बात लिखी गई है। जांच के आदेश हुए हैं। सीनियर छात्र दोषी मिले तो कार्रवाई होगी।  - डॉ. विक्रम सिंह, संस्थान प्रवक्ता

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