ब्रेन स्ट्रोक मरीजों के लिए वरदान बना पीजीआई

अमित यादव/लखनऊ Updated Mon, 25 Nov 2013 12:26 PM IST
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quick response to brain stroke in pgi

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संजय गांधी पीजीआई में ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को तुरंत इलाज मिलेगा।
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इसके लिए मरीज को स्ट्रोक के छह घंटे के अंदर पीजीआई पहुंचाना होगा।
संस्थान के रेडियोडॉयग्नोसिस और न्यूरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ मिलकर मरीजों का इलाज करेंगे।
स्ट्रोक के मरीजों को 24 घंटे सीटी स्कैन की सुविधा दी जाएगी और न्यूरोलॉजिस्ट उनका तुरंत इलाज शुरू करेंगे। इससे मरीजों की जान बचाना आसान होगा।

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यह जानकारी पीजीआई के रेडियोडायग्नोसिस विभाग के हेड प्रो. आर.वी. फडके ने दी। मौका था रविवार को एक्यूट स्ट्रोक पर आयोजित सतत् चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (सीएमई) का।

प्रो. फडके ने बताया कि दिमाग की नसों में खून का थक्का बनने से रक्त संचार बंद हो जाता है। इसी से ब्रेन स्ट्रोक पड़ता है।

दिमाग के जिस हिस्से में स्ट्रोक पड़ता है उस हिस्से से संचालित होने वाले अंग कार्य नहीं करते हैं।

इन मरीजों की सीटी स्कैन जांच कर यदि छह घंटे के अंदर एंटी थ्रम्बोटिक (खून का थक्का गलाने) दवाएं दी जाए तो दिमाग को कुछ हद तक बचाया जा सकता है। 60 फीसदी मरीजों में ब्रेन स्ट्रोक का कारण रक्त में थक्का बनना है।

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एसआरएमसी चेन्नई से आए इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजिस्ट प्रो. संतोष जोसेफ ने बताया कि मरीजों को जितनी जल्दी खून का थक्का गलाने की दवाएं दे दी जाएं, उसके लिए फायदेमंद होता है।

क्योंकि जैसे-जैसे देरी होती है मरीज के मस्तिष्क को खून न मिलने से नुकसान होता रहता है और मरीज को लकवा मार जाता है। कभी-कभी ये स्थिति जानलेवा भी होती है।

न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. सुनील प्रधान ने बताया कि स्ट्रोक का मरीज 4 से 6 घंटे के अंदर आता है और उसका सीटी स्कैन कराकर स्थिति का पता चल जाता है तो खून का थक्का गलाने की दवा उसे दे दी जाती है।

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यदि इससे उसे फायदा नहीं होता है तो इंटरवेंशनल न्यूरोरेडियोलॉजिस्ट मैकेनिकल स्टेंट की मदद से थक्के को हटाने का प्रयास करता है।

प्रो.आर.वी.फडके ने कहा कि लखनऊ में संजय गांधी पीजीआई, डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और केजीएमयू जैसे संस्थान हैं।

प्रस्ताव बनाया जा रहा है कि इन तीनों के विशेषज्ञ चिकित्सक मिलकर एक स्ट्रोक क्लीनिक बनाएं। जिससे 24 घंटे स्ट्रोक के मरीजों को इलाज मिल सके।

उन्होंने बताया कि पीजीआई में स्ट्रोक का मरीज आने पर 24 घंटे सीटी स्कैन जांच की व्यवस्था दी जाएगी और रिपोर्ट को न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाया जाएगा। जिससे उसे तुरंत इलाज मिल सके।
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