{"_id":"57722e984f1c1bcb7379c16c","slug":"quami-ekta-dal-counter-attacks-on-sp","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बौखलाए अफजाल बोले, सपा ने किया धोखा, पूर्वांचल में बताऊंगा औकात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बौखलाए अफजाल बोले, सपा ने किया धोखा, पूर्वांचल में बताऊंगा औकात
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 28 Jun 2016 08:31 PM IST
विज्ञापन
अफजाल अंसारी ने निकाला गुस्सा
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेताजी ने कहा था, बिछड़ गए थे चलो फिर से एक हो जाएं। राज्यसभा चुनाव में हमारा इस्तेमाल कर हमसे किनारा कर लिया गया। हमें धोखा दिया गया। ये बातें कौमी एकता दल के अध्यक्ष अफजाल अंसारी ने कहीं। साथ ही कहा कि पूर्वांचल में सपा को औकात दिखा दी जाएगी।
अफजाल ने कहा, जब समाजवादी पार्टी के आठ से दस विधायक क्रॉस वोटिंग पर आमादा हो गए तो इसकी चिंता में इनकी मजबूरी हुई कि कौमी एकता दल का वोट हासिल किया जाए। इसके लिए पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी से बात करवाई गई और यूपी के वरिष्ठ मंत्री बलराम यादव को मेरे घर भेजा गया। उन्होंने प्रस्ताव रखा और शिवपाल सिंह से बात करवाई। कौमी एकता दल के लोगों ने प्रस्ताव मानकर सपा के पक्ष में वोट देने की बात मान ली।
उन्होंने बताया, दस जून को मैं शिवपाल और 11 जून को मुलायम सिंह से मुलाकात की। नेताजी ने मतदान में समर्थन करने के लिए धन्यवाद किया और भूली-बिसरी यादों का जिक्र करते हुए कहा कि हम बिछड़ गए थे। कहा कि साम्प्रदायिक ताकतों को रोकना है। 2017 के चुनाव में मतों का विभाजन न हो इसलिए कौमी एकता दल को सपा से मिलाया जाए।
विज्ञापन
अफजाल ने बताया, मैंने उनसे एक हफ्ते का समय मांगा था। इसके बाद शिवपाल यादव ने 21 तारीख को कौमी एकता दल और सपा के विलय की घोषणा कर दी। इसके बाद खबर आई कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस विलय को गलत मानते हैं। बलराम यादव को सजा के तौर पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया। फिर 25 जून को मीटिंग के बाद अखिलेश की जिद के आगे मुलायम सिंह को झुकना पड़ा। कोई भी फैसला मीडिया या समाज में लाने से पहले आपस में सहमति
न पिता को बेटे के आदर्श का पता है न बेटे को पिता के फैसले की कद्र है। बेचारे चाचा शिवपाल मुलायम सिंह को भगवान मानते है, भगवान और उनके भक्त की कोई कद्र नहीं। अफजाल ने कहा कि हमारे भाई मुख्तार की छवि खराब करने की कोशिश की गई। हमारे पूर्वजों ने स्वाधीनता की लड़ाई में बड़ी भूमिका निभाई है।
विज्ञापन
अफजाल ने कहा, जब समाजवादी पार्टी के आठ से दस विधायक क्रॉस वोटिंग पर आमादा हो गए तो इसकी चिंता में इनकी मजबूरी हुई कि कौमी एकता दल का वोट हासिल किया जाए। इसके लिए पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी से बात करवाई गई और यूपी के वरिष्ठ मंत्री बलराम यादव को मेरे घर भेजा गया। उन्होंने प्रस्ताव रखा और शिवपाल सिंह से बात करवाई। कौमी एकता दल के लोगों ने प्रस्ताव मानकर सपा के पक्ष में वोट देने की बात मान ली।
विज्ञापन
उन्होंने बताया, दस जून को मैं शिवपाल और 11 जून को मुलायम सिंह से मुलाकात की। नेताजी ने मतदान में समर्थन करने के लिए धन्यवाद किया और भूली-बिसरी यादों का जिक्र करते हुए कहा कि हम बिछड़ गए थे। कहा कि साम्प्रदायिक ताकतों को रोकना है। 2017 के चुनाव में मतों का विभाजन न हो इसलिए कौमी एकता दल को सपा से मिलाया जाए।
विज्ञापन
अफजाल ने बताया, मैंने उनसे एक हफ्ते का समय मांगा था। इसके बाद शिवपाल यादव ने 21 तारीख को कौमी एकता दल और सपा के विलय की घोषणा कर दी। इसके बाद खबर आई कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस विलय को गलत मानते हैं। बलराम यादव को सजा के तौर पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया। फिर 25 जून को मीटिंग के बाद अखिलेश की जिद के आगे मुलायम सिंह को झुकना पड़ा। कोई भी फैसला मीडिया या समाज में लाने से पहले आपस में सहमति
न पिता को बेटे के आदर्श का पता है न बेटे को पिता के फैसले की कद्र है। बेचारे चाचा शिवपाल मुलायम सिंह को भगवान मानते है, भगवान और उनके भक्त की कोई कद्र नहीं। अफजाल ने कहा कि हमारे भाई मुख्तार की छवि खराब करने की कोशिश की गई। हमारे पूर्वजों ने स्वाधीनता की लड़ाई में बड़ी भूमिका निभाई है।
कुछ यूं हुआ था मुख्तार पर महाभारत
विवाद की शुरुआत मंगलवार 21 तारीख को हुई जब अफजाल अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का सपा में विलय हुआ था। शिवपाल यादव ने मीडिया के सामने कौमी एकता दल और सपा के विलय की घोषणा की। उसके कुछ घंटे बाद ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अचानक एक बड़ा फैसला करते हुए माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव को बर्खास्त कर दिया।
इस पूरे विवाद पर शिवपाल यादव ने बुधवार सुबह में सफाई दी थी, जिसमें उन्होंने कहा कि कौमी एकता दल, अफजाल अंसारी की पार्टी थी न कि मुख्तार अंसारी की। मुख्तार अंसारी जेल में हैं और उन्हें पार्टी में नहीं लिया गया है।
बलराम यादव की सपा सरकार से छुट्टी पर शिवपाल ने कहा था कि आखिर उनका इस्तीफा क्यों लिया गया इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। उनका बस इतना ही कहना था कि ये मुख्यमंत्री के विशेषाधिकार है कि वह सरकार में किसे रखते हैं और किसे नहीं।
इसके बाद एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कह दिया था कि मुख्तार जैसे लोगों का सपा में स्वागत नहीं है। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद शनिवार को केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई गई थी जिसमें कौएद के सपा में विलय के फैसले को रद्द कर दिया गया।
इस पूरे विवाद पर शिवपाल यादव ने बुधवार सुबह में सफाई दी थी, जिसमें उन्होंने कहा कि कौमी एकता दल, अफजाल अंसारी की पार्टी थी न कि मुख्तार अंसारी की। मुख्तार अंसारी जेल में हैं और उन्हें पार्टी में नहीं लिया गया है।
बलराम यादव की सपा सरकार से छुट्टी पर शिवपाल ने कहा था कि आखिर उनका इस्तीफा क्यों लिया गया इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। उनका बस इतना ही कहना था कि ये मुख्यमंत्री के विशेषाधिकार है कि वह सरकार में किसे रखते हैं और किसे नहीं।
इसके बाद एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कह दिया था कि मुख्तार जैसे लोगों का सपा में स्वागत नहीं है। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद शनिवार को केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई गई थी जिसमें कौएद के सपा में विलय के फैसले को रद्द कर दिया गया।