'सिल्वर क्वीन' सिंधू ने लखनऊ में सीखा था जूझने का जज्बा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिंधू ने यहीं पर जूझना सीखा था। कभी हार न मानना यहीं सीखा। जीतने का जज्बा भी इसी धरती पर भरा। यह और बात है कि वे स्वर्ण की लड़ाई नहीं जीत सकीं पर हारने से पहले वह खूब लड़ीं और सबका दिल जीत लिया।
रियो में कामयाबी की इबारत लिखने वाली सिंधू को लखनऊ की धरती कुछ ज्यादा ही रास आती है। यहां पर उन्होंने सैयद मोदी बैडमिंटन ग्रां प्री चैम्पियनशिप जीती तो जूनियर बैडमिंटन का ब्रांज मेडल भी यहीं पर जीता। गोमतीनगर स्थित यूपी बैडमिंटन अकादमी में उनकी चपलता व स्फूर्ति देखकर हर कोई हैरान रह जाता था।
सिंधू खुद कहती है कि यहां खेलकर उनका आत्मविश्वास दोगुना हो जाता है। राजधानी के प्रशंसकों को उनका बहुत क्रेज था। उन्हें प्रैक्टिस करते देखने और मिलने के लिए काफी भीड़ जुटती थी।
कामयाबी हासिल करने के लिए जमकर बहाया पसीना
पीवी सिंधू ने जबर्दस्त कामयाबी हासिल करने के लिए जमकर पसीना बजाया। ट्रेनिंग सेशन को वे बहुत महत्व देती थीं। सिंधू ने लखनऊ में तीन कैम्प में भाग लिया था। 2011 में उन्होंने दो कैम्प में हिस्सा लिया। तब उन्हें ताइपे में होने वाली जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप और लखनऊ में एशियन बैडमिंटन चैंपियन में शिरकत करनी थी।
इसके बाद सिंधू ने 2012 में जापान में होने वाली वर्ल्ड चैपियनशिप में प्रतिभा दिखाने के लिए लखनऊ में कैम्प किया था। सभी कैम्प 20 से 30 दिनों तक चले थे।
जिस खिलाड़ी से सिंधू हारीं वो लखनऊ में हार गई थी
ओलंपिक बैडमिंटन के फाइनल में पीवी सिंधू जिस स्पेनिश खिलाड़ी कैरोलिना मारिन से पार नहीं पा सकीं, वह डेढ़ साल पहले लखनऊ में हार चकी है। कैरोलिना 2015 में सैयद मोदी बैडमिंटन खेलने यहां आई थीं।
फाइनल में साइना नेहवाल ने उन्हें हराकर खिताब जीता था। हालांकि इससे पहले ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल में साइना कैरोलिना से हार गई थीं।