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हमारे लिए देवदूत बनकर आये पूजा और अभिषेक, ऑक्सीजन सिलेंडर देकर चले गए
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‘मेरे पिताजी मोहन चंद्र जोशी (85 साल) पिछले कुछ दिनों से संक्रमित हैं। घर पर ही उनका इलाज चल रहा था। हमने उनके लिए ऑक्सीजन सिलेंडर भी खरीद रखा था।
एक दिन रात में उनका ऑक्सीजन लेवल 84 तक पहुंच गया। लेकिन जब सिलेंडर लगाया तो पता चला कि उसमें ऑक्सीजन ही नहीं है।
हमने कई जगह प्रयास किया, लेकिन रात को 02 बजे कहां सहयोग मिलता। अंत में बेटी के दोस्त से पूजा का नंबर मिलाया।
बिना जान पहचान के होने के बाद भी पूजा ने रात 02 बजे मेरा फोन उठाया और जल्दी सहयोग का आश्वासन दिया। थोड़ी देर बाद किसी अभिषेक का फोन आया और उन्होंने घर का पता पूछा।
रात लगभग 03 बजे वो सिलेंडर लेकर मेरे घर पर पहुंचे। इस तरह मेरे पिताजी को रात में ऑक्सीजन मिली और सुबह उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया। अब वो काफी रिकवर कर रहे हैं। आज के समय में ऐसे देवदूत कम ही मिलते हैं।’
यह अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किया जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, गोमती नगर की निदेशक प्रो. कविता पाठक ने।
प्रो. पाठक ने कहा कि संक्रमण के इस दौर में लोग सर्वाधिक ऑक्सीजन और ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए भटक रहे हैं। यही वजह है कि ऑक्सीजन की कालाबाजारी भी जोरों पर है।
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कहीं सिलेंडर के लिए तो कहीं ऑक्सीजन के लिए पैसे वसूले जा रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच आज भी कुछ ऐसे लोग हैं जो गुमनाम रहकर भी सेवा कर रहे और उनको ऑक्सीजन आदि जरूरत की चीजें उपलब्ध करा रहे हैं।
मैंने भगवान को तो नहीं देखा, लेकिन ऐसे ही लोग हैं जो देवत्व का रूप हैं। ऐसे लोग मानवता की भी एक मिसाल हैं।
आज नहीं किया तो जीवन भर पछताएंगे
डॉ. कविता का रात में 02 बजे फोन उठाने वाली और देवदूत बनने वाली पूजा अग्निहोत्री असिस्टेंट डायरेक्टर सुडा हैं। उन्होंने बताया कि उस रात मुझे माइग्रेन था, लेकिन यह जानती थी कि इतनी रात कोई जरूरतमंद का ही फोन होगा। मैं डॉ. कविता को जानती नहीं थी, लेकिन उनकी बात सुनकर लगा कि मदद करनी चाहिए। मैंने डॉ. मनोज उपाध्याय से संपर्क किया और फिर अभिषेक के संपर्क से सिलेंडर की व्यवस्था हुई। पूजा ने कहा कि इस दौर में अगर हम किसी की सेवा नहीं कर पाए तो सिर्फ जीवनभर पछताएंगे की काश। आज के समय में पद, पैसा, रसूख कुछ नहीं काम आ रहा है। सिर्फ लोगों के संबंध काम आ रहे हैं। उक्त के अतिरिक्त भी प्रदेश में जहां से भी लोग संपर्क करते हैं उनको बेड, दवा, ऑक्सीजन दिलाने का प्रयास करती हूं।
ताऊजी की बीमारी में मिली सीख
डॉ. कविता के पिता के लिए सिलेंडर लेकर रात में 03 बजे पहुंचाने वाले अभिषेक शुक्ला का अपना टेलीकॉम का बिजनेस है। उन्होंने बताया कि मेरे ताऊ अशोक कुमार शुक्ला पिछले दिनों संक्रमित हुए तो ऑक्सीजन की दिक्कत और जरूरत से रूबरू हुआ। लगा कि किसी को इस किल्लत से न जूझना पड़े। लोगों को इसके लिए काफी परेशान होना पड़ता है। यही वजह है कि पूजाजी के सहयोग से जब भी अपनी क्षमता के अनुसार जहां भी संभव होता है, हम सेवा के लिए उपस्थित हो जाते हैं।
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एक दिन रात में उनका ऑक्सीजन लेवल 84 तक पहुंच गया। लेकिन जब सिलेंडर लगाया तो पता चला कि उसमें ऑक्सीजन ही नहीं है।
हमने कई जगह प्रयास किया, लेकिन रात को 02 बजे कहां सहयोग मिलता। अंत में बेटी के दोस्त से पूजा का नंबर मिलाया।
बिना जान पहचान के होने के बाद भी पूजा ने रात 02 बजे मेरा फोन उठाया और जल्दी सहयोग का आश्वासन दिया। थोड़ी देर बाद किसी अभिषेक का फोन आया और उन्होंने घर का पता पूछा।
रात लगभग 03 बजे वो सिलेंडर लेकर मेरे घर पर पहुंचे। इस तरह मेरे पिताजी को रात में ऑक्सीजन मिली और सुबह उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया। अब वो काफी रिकवर कर रहे हैं। आज के समय में ऐसे देवदूत कम ही मिलते हैं।’
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यह अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किया जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, गोमती नगर की निदेशक प्रो. कविता पाठक ने।
प्रो. पाठक ने कहा कि संक्रमण के इस दौर में लोग सर्वाधिक ऑक्सीजन और ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए भटक रहे हैं। यही वजह है कि ऑक्सीजन की कालाबाजारी भी जोरों पर है।
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कहीं सिलेंडर के लिए तो कहीं ऑक्सीजन के लिए पैसे वसूले जा रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच आज भी कुछ ऐसे लोग हैं जो गुमनाम रहकर भी सेवा कर रहे और उनको ऑक्सीजन आदि जरूरत की चीजें उपलब्ध करा रहे हैं।
मैंने भगवान को तो नहीं देखा, लेकिन ऐसे ही लोग हैं जो देवत्व का रूप हैं। ऐसे लोग मानवता की भी एक मिसाल हैं।
आज नहीं किया तो जीवन भर पछताएंगे
डॉ. कविता का रात में 02 बजे फोन उठाने वाली और देवदूत बनने वाली पूजा अग्निहोत्री असिस्टेंट डायरेक्टर सुडा हैं। उन्होंने बताया कि उस रात मुझे माइग्रेन था, लेकिन यह जानती थी कि इतनी रात कोई जरूरतमंद का ही फोन होगा। मैं डॉ. कविता को जानती नहीं थी, लेकिन उनकी बात सुनकर लगा कि मदद करनी चाहिए। मैंने डॉ. मनोज उपाध्याय से संपर्क किया और फिर अभिषेक के संपर्क से सिलेंडर की व्यवस्था हुई। पूजा ने कहा कि इस दौर में अगर हम किसी की सेवा नहीं कर पाए तो सिर्फ जीवनभर पछताएंगे की काश। आज के समय में पद, पैसा, रसूख कुछ नहीं काम आ रहा है। सिर्फ लोगों के संबंध काम आ रहे हैं। उक्त के अतिरिक्त भी प्रदेश में जहां से भी लोग संपर्क करते हैं उनको बेड, दवा, ऑक्सीजन दिलाने का प्रयास करती हूं।
ताऊजी की बीमारी में मिली सीख
डॉ. कविता के पिता के लिए सिलेंडर लेकर रात में 03 बजे पहुंचाने वाले अभिषेक शुक्ला का अपना टेलीकॉम का बिजनेस है। उन्होंने बताया कि मेरे ताऊ अशोक कुमार शुक्ला पिछले दिनों संक्रमित हुए तो ऑक्सीजन की दिक्कत और जरूरत से रूबरू हुआ। लगा कि किसी को इस किल्लत से न जूझना पड़े। लोगों को इसके लिए काफी परेशान होना पड़ता है। यही वजह है कि पूजाजी के सहयोग से जब भी अपनी क्षमता के अनुसार जहां भी संभव होता है, हम सेवा के लिए उपस्थित हो जाते हैं।