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जनता सब जानती है
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Mon, 23 Dec 2013 10:07 AM IST
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बसपा के एक पूर्व मंत्री हैं। मंत्री रहते हुए उन्होंने अपने जिले में एक महोत्सव का आयोजन किया था।
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जिले के नामी शायर की गरीबी में मदद की थी और उनकी कृतियों को प्रकाशित कराने का भरोसा भी दिया था, मगर पिछले विधानसभा चुनाव में उनका टिकट कट गया।
बाद में लोकसभा के टिकट के लिए उन्होंने पूरा दम लगा दिया। बात नहीं बनी तो शायर को भुलाकर अपने पुराने ठौर मायानगरी पहुंच गए।
मगर पिछले दिनों दो ऐसी घटनाएं हुईं जिन्होंने उन्हें अचानक फिर सुर्खियों में ला दिया। एक तो वह जिस सीट से लोकसभा का टिकट चाहते थे वहां से पार्टी ने जिन्हें टिकट दिया था, उन पर शामत आ गई।
दूसरा, उन शायर की मौत हो गई। नेताजी इन दोनों अवसरों का लाभ उठाने के लिए तत्काल सक्रिय हो गए। पार्टी में भी लाइन-लेंथ मिलाई।
जैसे ही सिग्नल ग्रीन हुआ, उन्होंने आनन-फानन में शायर की कृतियां छपवा डालीं। जिले में आकर उसके विमोचन का कार्यक्रम भी करा दिया।
अभी शायर की कृतियों के विमोचन के चंद दिन ही बीते थे कि टिकट भी मिल गया। इलाके के लोग पूर्व मंत्री के अचानक सक्रिय होने का मतलब समझा रहे हैं।