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बिजली उपभोक्ताओं को तीन साल तक दिलाएं सात फीसदी रेगुलेटरी लाभ
Wed, 18 Nov 2020 11:01 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 18 Nov 2020 11:01 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को बिजली कंपनियों से तीन साल तक सात प्रतिशत रेगुलेटरी लाभ दिलाने की मांग की है। बीते 11 नवंबर को राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी टैरिफ आर्डर पर परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा की ओर से बुधवार को इस बाबत पुनर्विचार याचिका दायर किया।
पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि पूर्व में बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 13,337 करोड़ रुपये निकला था। इस पर वर्ष 2018-19 से अब तक कैरिंग कास्ट (ब्याज) 12 प्रतिशत के अनुसार लगभग 5400 करोड़ अतिरिक्त हो रहा है। वर्ष 2020-21 में भी उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर लगभग 800 करोड़ रुपये निकला है। इस प्रकार उपभोक्ताओं को कुल 19,535 करोड़ रुपये का लाभ मिलना है। मगर पूरी रकम का लाभ एक साथ देने से बिजली कंपनियों की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। लिहाजा इसका लाभ अगले तीन वर्षों में दिया जाए।
यह तभी संभव होगा जब तीन साल तक ग्रामीण व शहरी घरेलू उपभोक्ताओं का फिक्स चार्ज पूरी तरह समाप्त किया जाए और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के न्यूनतम चार्ज को खत्म करते हुए फिक्स डिमांड चार्ज में 10 प्रतिशत की कमी की जाए।
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इसके अतिरिक्त याचिका में किसानों की बिजली दरें 170 रुपये प्रति हार्स पावर से कम करके 150 रुपये प्रति हार्स पावर किए जाने की मांग की गई है। ग्रामीण अनमीटर्ड घरेलू उपभोक्ताओं की मौजूदा दर में 30 प्रतिशत की कटौती का प्रस्ताव दिया गया है। परिषद का कहना है कि पिछले तीन साल में बिजली दरों में बढ़ोतरी के कारण इसका प्रति व्यक्ति उपभोग घटा है। ऐसे में बिजली दरों में कमी करके सुधारवादी कदम उठाया जाना चाहिए।
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पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि पूर्व में बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 13,337 करोड़ रुपये निकला था। इस पर वर्ष 2018-19 से अब तक कैरिंग कास्ट (ब्याज) 12 प्रतिशत के अनुसार लगभग 5400 करोड़ अतिरिक्त हो रहा है। वर्ष 2020-21 में भी उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर लगभग 800 करोड़ रुपये निकला है। इस प्रकार उपभोक्ताओं को कुल 19,535 करोड़ रुपये का लाभ मिलना है। मगर पूरी रकम का लाभ एक साथ देने से बिजली कंपनियों की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। लिहाजा इसका लाभ अगले तीन वर्षों में दिया जाए।
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यह तभी संभव होगा जब तीन साल तक ग्रामीण व शहरी घरेलू उपभोक्ताओं का फिक्स चार्ज पूरी तरह समाप्त किया जाए और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के न्यूनतम चार्ज को खत्म करते हुए फिक्स डिमांड चार्ज में 10 प्रतिशत की कमी की जाए।
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इसके अतिरिक्त याचिका में किसानों की बिजली दरें 170 रुपये प्रति हार्स पावर से कम करके 150 रुपये प्रति हार्स पावर किए जाने की मांग की गई है। ग्रामीण अनमीटर्ड घरेलू उपभोक्ताओं की मौजूदा दर में 30 प्रतिशत की कटौती का प्रस्ताव दिया गया है। परिषद का कहना है कि पिछले तीन साल में बिजली दरों में बढ़ोतरी के कारण इसका प्रति व्यक्ति उपभोग घटा है। ऐसे में बिजली दरों में कमी करके सुधारवादी कदम उठाया जाना चाहिए।