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नई पेंशन नीति के विरोध में कभी भी हो सकता है हड़ताल
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Sun, 08 Sep 2013 09:29 AM IST
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नई पेंशन नीति बिल पारित होने के व्यापक विरोध की तैयारियां कर्मचारी संगठनों ने तेज कर दी है।
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कर्मचारियों अपने कार्यालयों में ही कार्य बहिष्कार कर विरोध सभा की। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद व समर्थक संगठनों के पदाधिकारियों ने विभागों का दौरा कर जनसमर्थन जुटाया।
जिला मंत्री अमिता त्रिपाठी ने बताया कि नई नीति का विरोध हर विभाग में शुरू हो गया है। आंदोलन अब जिलों में भी शुरू हो गया है। विभागों की इकाइयां भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गई हैं।
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जिला मुख्यालयों पर भी कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के रवैये की निंदा करते हुए व्यापक आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।
शनिवार को परिषद के साथ विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों के नेतृत्व में सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, जवाहर भवन, इंदिरा भवन के विभागों के अलावा बापू भवन, उद्यान विभाग, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, वाणिज्य कर विभाग तथा शिक्षा विभाग, मंडी परिषद राष्ट्रीय बचत विभाग में कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर विरोध सभा की।
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प्रांतीय पर्यवेक्षक एलएन सचान ने बताया कि एक दर्जन विभागों की विरोध सभा में कर्मचारियों के तीखे तेवर सामने आ रहे हैं। लगातार विरोध किए जाने के साथ संगठनों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है।
24 व 25 को विरोध में शामिल संगठनों के पदाधिकारी भूख हड़ताल करेंगे। उसके बाद 26 से अनिश्चित कालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। सचान ने कहा कि कर्मचारियों पर बढ़ते कार्य उत्तरदायित्व के अनुपात में सुविधाएं कम करना मंजूर नहीं हैं।
पद से पद की समानता के आधार पर राज्य कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के अनुरूप समान वेतन व भत्ता दिए जाने का वादा भी राज्य सरकार पूरा करने को तैयार नहीं है।
अब पीएफआरडीए बिल पारित किए जाने से कर्मचारी विचलित हो गए हैं। जिला अध्यक्ष वीएस डोलिया ने कहा कि सभी संगठन एकजुट होकर हड़ताल की रूपरेखा तैयार करेंगे।
जिसमें सभी जिलों की इकाइयों को शामिल कर आंदोलन को वृहद रूप दिया जाएगा। विरोध सभा में प्रमुख रूप से गिरीश पांडे, विनय कुमार श्रीवास्तव, जगदीश सिंह, संजय सिंह, गायत्री दारापुरी, नैनवाल, आशुतोष सिंह, आरके पाल, राजेश सिन्हा शामिल रहे।