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शहर के कई इलाकों में आना-जाना आसान नहीं है। कई जगह सड़कें संकरी हैं तो कई जगहों पर जाम का झाम। यह भले ही एक सामान्य समस्या लगे।
इससे आपकी प्रॉपर्टी, जिसमें मकान या कॉमर्शियल भवन हो सकते हैं, इनकी कीमत कम ही आंकी जाएगी। इससे आपको इसे बेचने या फिर इस प्रॉपर्टी पर लोन लेने के समय नुकसान उठाना होगा। आंकलन में यह कमी उसी तरह की प्रॉपर्टी की दूसरे इलाकों की तुलना में 40 प्रतिशत तक हो सकती है।
इंस्टीट्यूट ऑफ वैल्यूअर्स की 46वीं सालाना कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन वैल्यूअर्स ने यह जानकारी दी। रविवार को वैल्यूअर्स ने अलग-अलग इलाकों का निरीक्षण किया।
इसमें पुराने लखनऊ के इलाकों के साथ हेरीटेज वैल्यू की इमारतों का भी भ्रमण किया। वैल्यूअर अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पुराने लखनऊ में गोमतीनगर या इंदिरानगर के इलाकों की अपेक्षा आना-जाना मुश्किल है। इसे ईज टू एक्सेस कहा जाता है।
एक वैल्यूअर अपने काम के समय केवल प्रॉपर्टी की भौतिक हालत को ही नहीं देखता। इसके साथ उसे उस प्रॉपर्टी की लोकेशन और वहां तक पहुंचने के रास्तों की हालत को भी आंकना होता है। इससे ही प्रॉपर्टी की सही वेल्यू तय होती है।
उनका कहना था कि हमने खुद देखा है कि लखनऊ के पुराने इलाकों में ईज टू एक्सेस नहीं है। जाम लगने से लेकर रास्ते भी संकरे हो गए हैं। दूसरे संसाधन जिनमें ड्रेनेज-सीवरेज सिस्टम भी जिनमें शामिल है, इनका खराब होना भी प्रभावित करता है।
ऐसे में अगर आप कोई प्रोपर्टी खरीद रहे तो यह जरूर देख लें कि ईज टू एक्सेस केसाथ वहां मूलभूत संसाधनों की हालत क्या है? यह ही आपको भविष्य में अपनी प्रोपर्टी से मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा जैसे जरूरत के समय उचित लोन दिला पाएगा।
1.80 करोड़ का बंगला भी कीमती नहीं
मुंबई के वैल्यूअर आरके गांधी का कहना था कि एक बंगला जिसका क्षेत्रफल 4,000 वर्गफीट है। इसमें एक स्विमिंगपूल भी है। इसकी कीमत बंगला मालिक को 1.80 करोड़ रुपये में पड़ी। इसमें सिर्फ एक कमी रही। इसकी लोकेशन जोकि ग्रामीण इलाके में थी।
जरूरत के समय एक वैल्यूअस इसे 10 लाख से अधिक में नहीं आंकता। इसकी वजह यह है कि इसका कोई खरीददार ही नहीं मिलेगा। ऐसा ही एक मामला मेरे सामने आया। 1.80 करोड़ रुपये के लागत वाले बंगले की कीमत केवल 10 लाख रुपये आंकी गई। यह वैल्यू भी इसलिए मिल गई, क्योंकि कुछ लोग इसे किराए पर लेने के लिए सहमत दिखे।
आरके गांधी गांधी ने कहा कि हम भारतीयों में एक कमी है। हम रिसर्च नहीं करना चाहते। हमारे पास सबसे अच्छे दिमाग मौजूद हैं। हम रिसर्च कर सकते हैं। इसके बाद भी रिसर्च केलिए जोखिम नहीं लेते। वैल्यूएशन के क्षेत्र में आज इस रिसर्च की जरूरत है।