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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Problem with state Congress executive committee.

यूपी कांग्रेस को फिर दर्द दे रहा है पुराना 'कांटा'

Sat, 17 Jan 2015 12:50 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 17 Jan 2015 12:50 AM IST
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Problem with state Congress executive committee.

राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी प्रदेश कांग्रेस कमेटी में विशेष आमंत्रित सदस्य हैं जबकि इनकी बेटी आराधना मिश्र उर्फ मोना को महासचिव बनाया गया है। यही नहीं ये पार्टी की इवेंट को-ऑर्डिनेटर भी होंगी।

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पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी भी विशेष आमंत्रित सदस्य हैं, जबकि इनके भाई शेखर बहुगुणा कार्यकारिणी सदस्य बनाए गए हैं। मोहसिना किदवई भी विशेष आमंत्रित सदस्य हैं, जबकि इनके भांजे फवाद किदवई महासचिव बनाए गए हैं।
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इसी तरह राजेश पति त्रिपाठी कार्यकारिणी सदस्य और बेटे ललितेश पति त्रिपाठी महासचिव, जफर अली नकवी विशेष आमंत्रित सदस्य और बेटे सैफ अली नकवी सचिव तथा बेगम नूर बानो व बेटे नवाब काजिम अली खान विशेष आमंत्रित सदस्य बनाए गए हैं।
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ये चंद उदाहरण हैं जो प्रदेश कांग्रेस कमेटी में परिवारवाद को बढ़ावा दिए जाने के आरोपों को पुख्ता करते हैं। वहीं कई पुराने कांग्रेसियों को कमेटी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री परिवारवाद को तरजीह दिए जाने से इन्कार करते हैं।

प्रदेश कार्यकारिणी में 401 सदस्य

Problem with state Congress executive committee.

13 जनवरी को घोषित 401 सदस्यीय जंबोजेट कार्यकारिणी के बावजूद कई पुराने कांग्रेसी नेताओं को जगह नहीं मिली, वहीं कुछ को दो-दो पद दिए गए हैं। इस कारण कांग्रेस में असंतोष के स्वर फूट रहे हैं। पहले ही दिन तीन कांग्रेसी नेताओं ने कार्यकारिणी के पदों से इस्तीफा दे दिया था। कई और नेता भी प्रदेश अध्यक्ष से विरोध दर्ज करा चुके हैं।

इन्हें मिली दोहरी जिम्मेदारी
प्रदेश कांग्रेस कमेटी में कई नेताओं को दोहरी जिम्मेदारी भी दी गई है। सिराज मेहंदी उपाध्यक्ष बनाए गए हैं, जबकि इनके पास अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमैन की भी जिम्मेदारी है। इसी तरह भगवती प्रसाद चौधरी उपाध्यक्ष के साथ ही एससी-एसटी विभाग के चेयरमैन भी हैं।

सत्यदेव त्रिपाठी उपाध्यक्ष हैं और इन्हें कम्युनिकेशन विभाग का चेयरमैन भी बनाया गया है। शिव पांडेय को संगठन मंत्री के साथ सोशल मीडिया का इंचार्ज भी बनाया गया है, जबकि वे पार्टी में नए हैं।

पार्टी में नए, लेकिन महत्वपूर्ण जिम्मा
कई नेता हाल ही पार्टी में आए हैं, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष का खास होने के कारण उन्हें महत्वपूर्ण पद मिल गया है। ओंकार सिंह कुछ समय पहले ही कांग्रेस में शामिल हुए हैं और उन्हें महासचिव की जिम्मेदारी मिल गई है। चौधरी सत्यवीर सिंह व प्रमोद सिंह को भी महासचिव पद मिल गया है।

20 साल की कांग्रेस की सेवा पर नहीं मिला पद

Problem with state Congress executive committee.

आरपी सिंह ने 20 वर्ष तक यूथ कांग्रेस की सेवा की। इसके बाद वे कांग्रेस संगठन में आए। पिछले विधानसभा व लोकसभा चुनाव में भी इन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इन्हें प्रदेश प्रवक्ता का पद भी मिला, लेकिन नई टीम में ये जगह नहीं बना पाए। रमेश मिश्र, राजेंद्र शर्मा, सुबोध श्रीवास्तव व जेपी सिंह को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। संगठन में दो बार महामंत्री रहे शिव भगवान का डिमोशन कर उन्हें सचिव बनाया गया है।

इन आरोपों पर प्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री का कहना है कि वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को कार्यकारिणी या फिर विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है, जबकि उनके परिवार के सदस्य सक्रिय राजनीति में होने के कारण ही कमेटी में जगह बना पाए हैं। यह बात सही है कि कुछ वरिष्ठ कांग्रेसी छूट गए हैं। इन्हें जल्द ही संगठन में सम्मानजनक पद दिया जाएगा।

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