{"_id":"63c7d79757da8010f9272f7b","slug":"pro-vinay-pathak-case-co-accused-ajay-mishra-got-bail-in-recovery-and-corruption-case-2023-01-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रो. विनय पाठक प्रकरण : वसूली और भ्रष्टाचार के मामले में सह अभियुक्त अजय मिश्रा को मिली जमानत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रो. विनय पाठक प्रकरण : वसूली और भ्रष्टाचार के मामले में सह अभियुक्त अजय मिश्रा को मिली जमानत
Wed, 18 Jan 2023 09:55 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 18 Jan 2023 09:55 PM IST
सार
दोनों अभियुक्तों के खिलाफ 29 अक्टूबर 2022 को इंदिरा नगर थाने में डेविड मारियो डेनिस ने एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि पाठक के आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति रहने के दौरान उसके कम्पनी द्वारा किए गए कार्यों के भुगतान के लिए अभियुक्तों ने 15 प्रतिशत कमीशन वसूला।
विज्ञापन
प्रो. विनय कुमार पाठक
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति प्रो. विनय पाठक के सहयोगी अजय मिश्रा की जमानत सशर्त मंजूर कर ली है। साथ ही कहा कि मामले की जांच अब सीबीआई को सौंप दी गई है, उसमें कितना वक्त लगेगा कहना मुश्किल है। मामले में अभी तक विनय पाठक से किसी एजेंसी ने पूछताछ भी नहीं की है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चैहान की एकल पीठ ने अजय को जमानत देते हुए कहा है कि वह रिहा होने के एक सप्ताह के भीतर सीबीआई के विवेचनाधिकारी के समक्ष उपस्थित होगा और इसमें पूरा सहयोग करेगा। मालूम हो कमीशनखोरी समेत कई अन्य गंभीर आरोप लगाते हुए प्रो. पाठक और सह-अभियुक्त अजय मिश्रा के खिलाफ इंदिरानगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। आरोप लगाने वाले डेविड मारियो डेनिस का कहना है कि पाठक के आगरा विवि के कुलपति रहने के दौरान उसके कम्पनी द्वारा किए गए कार्यों के भुगतान के लिए अभियुक्तों ने 15 प्रतिशत कमीशन वसूला। एफआईआर में यह भी कहा गया कि वादी को उक्त अभियुक्तों से अपनी जान को खतरा है। वहीं, अजय मिश्रा की ओर से हाईकोर्ट में बताया गया कि उस पर लगाए गए आरोप गलत हैं। इसी कारण कथित वसूली के कई दिन बीत जाने के बाद एफआईआर दर्ज कराई गई। संवाद
विज्ञापन