प्रियंका गांधी के सामने कांग्रेस को खड़ा करने की चुनौती तो नेताओं में उनका भरोसा जीतने की चिंता
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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा जहां यूपी में संगठन को मजबूती से खड़ा करने की समस्या से दो-चार हो रही हैं, वहीं प्रदेश के नेता उनका भरोसा जीतने की चिंता में ज्यादा डूबे दिखे। इस लिहाज से ज्यादा बोलना कहीं उल्टा न पड़ जाए, इसलिए इन नेताओं ने बैठकों में नपे-तुले शब्दों में ही अपनी बात रखी।
ज्यादातर नेताओं की एक ही चिंता थी कि किसी तरह प्रियंका की नजरों में आ जाएं, ताकि भविष्य के काम पक्के हो जाएं। अलबत्ता प्रियंका ने फ्रंटल संगठनों की निष्क्रियता पर कड़ी नाराजगी जताई।
प्रियंका ने शुक्रवार को पीसीसी मुख्यालय पर यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई और अल्पसंख्यक समेत सभी प्रकोष्ठों के प्रमुख नेताओं से मुलाकात की। इन फ्रंटल संगठनों की स्थानीय स्तर पर प्रभावी कमेटियां नहीं हैं। मुख्य पार्टी के कार्यक्रमों में ही इनके नेता अपने चेहरे दिखाते हैं।
अलग से आंदोलन के न तो कोई कार्यक्रम लेते हैं और न ही भीड़ जुटा पाने की स्थिति में हैं। प्रियंका ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमें इस स्थिति को बदलना होगा। फ्रंटल संगठनों के नेताओं को इन संगठनों की गतिविधियों के माध्यम से ही अपनी पहचान बनानी होगी। पार्टी में उनकी सेवाओं का प्रतिफल भी तभी मिल सकेगा।
काफी अनुशासित दिखे कांग्रेसी नेता
यूं तो कांग्रेस के नेता बैठकों में काफी हमलावर रहते हैं। कई बार छोटी-छोटी बातों को लेकर वरिष्ठ नेताओं के सामने लड़ जाते हैं। लेकिन, शुक्रवार को वे काफी अनुशासित दिखे।
इसके पीछे की मंशा सिर्फ इतनी थी कि प्रियंका की नजरों में खराब छवि बनी तो फिर यूपी कांग्रेस में कभी महत्व नहीं पा सकेंगे। जिस तरह से यूपी की राजनीति में पार्टी प्रभावशाली हो रही है, उसमें देर-सबेर भाजपा का विकल्प बनकर कांग्रेस ही उभरेगी।
भाजपा भी इसे अपने लिए मुफीद मानती है। प्रियंका के ट्वीट या सीएम को पत्र लिखने के बाद आनन-फानन में कार्रवाई इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।