मगहर से पीएम मोदी ने महागठबंधन पर साधा निशाना, मिशन 2019 के लिए इन बातों का किया जिक्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बृहस्पतिवार को कबीर दास की निर्वाण स्थली मगहर की यात्रा और सभा पर मिशन 2019 की छाप साफ दिखाई दी। शायद फूलपुर, गोरखपुर, नूरपुर व कैराना के उपचुनाव की पराजय ही कारण रहे जो प्रधानमंत्री मोदी गोरखपुर के नजदीक जब इस स्थल पर पहुंचे तो उन्होंने न सिर्फ शब्दों से बल्कि हाव-भाव से महागठबंधन के गणित को कमजोर करने की कोशिश की। संकेतों और प्रतीकों की सियासत में माहिर मोदी ने कबीर की मजार और समाधि दोनों स्थलों पर जाकर देश के विभिन्न हिस्सों में बसे करोड़ों कबीर पंथियों को जोड़ने का प्रयास किया।
कबीर की निर्वाण स्थली पर पहुंचने वाले पहले प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी शिक्षाओं का हवाला देते हुए सपा, बसपा और कांग्रेस को गरीब और महिला विरोधी करार दिया तो भाजपा की सरकारों को कबीर की शिक्षाओं के अनुरूप सबका साथ और सबका विकास करने वाला बताया। कहा कि गैर भाजपाई दल कबीर के दर्शन को समझ ही नहीं पा रहे। उन्होंने कबीर के सहारे दलितों व पिछड़ों को भी साधने का प्रयास किया।
इस तरह मोदी ने पूर्वांचल से जोड़ा नाता
पूर्वांचल के इस नगरी में आए मोदी ने पुरबिया और भोजपुरी बोली में संबोधन शुरू कर तथा अंत में ‘साहेब बंदगी’ और ‘पाय लागी’ जैसे संबोधन से न सिर्फ यहां के लोगों बल्कि देश भर के कबीर पंथियों और हिंदी भाषी लोगों से खुद को जोड़ लिया। उन्होंने मगहर में कबीर अकादमी का शिलान्यास कर आंचलिक बोलियों और लोक विधाओं के विकास का रास्ता खोलकर भी खुद को हर तरह की बोली बोलने वालों से जोड़ने की कोशिश की।
पहनावे और हाव-भाव से भी खुद को पूर्वांचल से जोड़ने की कोशिश की
मोदी ने अपने भाषण ही नहीं, पहनावे और हाव-भाव से भी खुद को पूर्वांचल से जोड़ने की कोशिश की। आधी आस्तीन का सफेद कुर्ता-पाजामा और गले में सफेद गमछा लिए मोदी ने कबीर से जुड़ा एक-एक स्थल देखा। हो सकता है उनका मगहर आने का उद्देश्य सियासी भी हो, पर उनके भीतर भारतीय संस्कृति और सरोकारों को नजदीक से समझने और संतों के प्रति श्रद्धा व सम्मान की झलक दिखी।
इस तरह निशाना
मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का उल्लेख कर यह बताने की कोशिश की कि सियासी खांचों में संकीर्ण दृष्टिकोण से काम करने वाली गैर भाजपाई सरकारों ने मगहर को महत्व नहीं दिया। साथ ही मगहर में शुरू कराए जा रहे कामों का हवाला देते हुए यह संदेश भी दिया कि भाजपा की सरकार विकास के काम को सियासत की संकीर्ण दृष्टि से नहीं देखती।
उन्होंने कबीर के दोहा - मानुष की जाति एक...- का उल्लेख करते हुए और यह कहते हुए कि कबीर धूल से उठे लेकिन माथे का चंदन बन गए, परोक्ष तौर पर परिवारवाद व जातिवाद की राजनीति करने वालों पर निशाना साधा। कांग्रेस भी उनके निशाने से नहीं बची।
उन्होंने कहा कि कबीर ने शासक को भगवान राम से प्रेरणा लेने की बात कही थी, पर कुछ परिवार खुद को जनता का भाग्य विधाता समझने के भ्रम में कबीर का उपदेश भूल गए। कबीर ने कहा था कि सेवा में मन लगाओ। पर, कुछ राजनेताओं का मन सेवा के बजाय अपने बंगलों में लगा रहा। ये वही राजनेता हैं, जिन्होंने सरकार में रहते गरीबों के घर की चिंता नहीं की। उनका निशाना अखिलेश यादव और मायावती पर था।
महागठबंधन का जातीय गणित तोड़ने की कोशिश
मोदी ने कबीर के साथ बल्लभाचार्य, रामानुजाचार्य, रामानंद, तुलसीदास, सूरदास, संत रविदास, तुकाराम, मीराबाई सहित देश में चारों दिशाओं में समाज जागरण का काम करने वाले संतों का उल्लेख कर उन्हें एक-दूसरे के सरोकारों से जोड़ा। यह कहते हुए कि इनमें कोई भी संत जात-पांत को नहीं मानता था। कुछ राजनेता कबीर और इन संतों का भाव नहीं समझ पा रहे हैं। उन्होंने अपने संबोधन में महागठबंधन के गणित को तोड़ने की कोशिश की।
कहा, अंबेडकर और फुले जैसे कई महापुरुषों के नाम पर राजनीतिक धारा खड़ी करके समाज में असंतोष, अशांति पैदा करके लाभ लेने की कोशिश हो रही है। इन्हें गरीबों की सुविधाओं की नहीं, अपने परिवार की सत्ता की चिंता है। वे अपने हित के लिए समाज को कमजोर कर रहे हैं। वोट के लिए तीन तलाक का कानून मंजूर नहीं होने दे रहे हैं।
याद दिलाया कि 43 साल पहले आपातकाल लगाने और उसके विरोध में लड़ने वाले कंधे से कंधा मिला रहे हैं। समाजवाद और बहुजन की बातें करने वाले लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं।