शिक्षकों पर पढ़ाने के साथ स्कूल में छात्र लाने की भी जिम्मेदारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यदि आप परिषदीय स्कूलों में शिक्षक इसलिए बनना चाहते हैं कि यहां की जिंदगी थोड़ी आसान और चुनौतियां कम हैं तो जरा रुकिए। अब ऐसा नहीं होगा। इन स्कूलों के शिक्षकों को एक अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जा रही है।
परिषदीय स्कूलों के शिक्षक अब पढ़ाएंगे ही नहीं बल्कि बच्चों का दाखिला भी कराएंगे। इसके लिए उन्हें घर-घर जाकर बच्चों के अभिभावकों से मिलकर यह बताना होगा कि बच्चों के भविष्य के लिए क्या जरूरी है।
परिषदीय स्कूलों में दाखिले के लिए 7 से 21 जुलाई तक दाखिले के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। सर्व शिक्षा अभियान की राज्य परियोजना निदेशक शीतल वर्मा ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भेजे निर्देश में कहा है कि दाखिले के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
हर बच्चे को स्कूल लाना जरूरी
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों की शिक्षा अनिवार्य कर दी गई है। इसके लिए परिषदीय स्कूलों में उनका दाखिला अनिवार्य कर दिया गया है। सर्व शिक्षा अभियान की राज्य परियोजना निदेशक ने कहा है कि 1 जुलाई को स्कूल पुन: खुल गए हैं।
बच्चों को दाखिला दिलाने के लिए 1 से 31 मार्च तक स्कूल चलो अभियान चलाया जा चुका है। इसमें मेला, रैली व गोष्ठियां भी आयोजित की गईं। स्कूल जुलाई में खुल चुका है। इसलिए अभियान चलाया जाए और बच्चों को दाखिला दिलाया जाए।
उन्होंने नारा देते हुए कहा कि ‘विद्यालय से एक भी बच्चा छूट गया तो संकल्प हमारा टूट गया’ के संकल्प की पूर्ति सुनिश्चित की जाए। प्राइमरी, उच्च प्राइमरी और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में शत-प्रतिशत दाखिले के लिए 7 से 21 जुलाई के बीच विशेष अभियान चलाया जाए।