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लौटेगा हस्तिनापुर का गौरव, सीएम ने दिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश
Sat, 04 Jan 2020 09:39 PM IST
अवधेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: अवधेश कुमार
Updated Sat, 04 Jan 2020 09:39 PM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाभारतकालीन नगरी हस्तिनापुर की बदहाली का संज्ञान लिया है। विधान परिषद सदस्य और पूर्व मंत्री यशवंत सिंह के पत्र के बाद उन्होंने पर्यटन विभाग और संस्कृति निदेशालय को हस्तिनापुर का गौरव बहाल करने के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं।
भाजपा एमएलसी यशवंत सिंह बिजनौर लोकसभा सीट पर चुनाव के दौरान अप्रैल 2019 में हस्तिनापुर गए थे। उन्होंने इस ऐतिहासिक नगरी की बदहाली को करीब से देखा था। उन्होंने संस्कृति, इतिहास और पत्रकारिता से जुड़े बुद्धिजीवियों का दल 25 दिसंबर को हस्तिनापुर भेजा। इसी दल की रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने 30 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भारत का गौरव रहे हस्तिनापुर की दुर्दशा को लेकर पत्र लिखा था।
मुख्यमंत्री ने उनके खत को संज्ञान में लेते हुए पर्यटन विभाग और संस्कृति निदेशालय को हस्तिनापुर का गौरव बहाल करने के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश की जानकारी मिलने पर शनिवार को राजधानी में दारुलशफा स्थित चन्द्रशेखर चबूतरे पर मौजूद लोकतंत्र सेनानियों ने एमएलसी यशवंत सिंह को बधाई दी। हस्तिनापुर के लिए कार्ययोजना बनाने के सीएम योगी के फैसले पर मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया गया।
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यशवंत सिंह ने कहा कि प्रदेश को ऐसे मुख्यमंत्री मिले हैं जो संत हैं और जिनके दामन पर कोई दाग नहीं है। उनका जीवन देश और समाज कल्याण के लिए समर्पित है। हस्तिनापुर का कायाकल्प भी उन्हीं की नजर पड़ने से होने जा रहा है। उन्होंने जय हस्तिनापुर अभियान चलाने वालों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हस्तिनापुर में बदहाली का शिकार महाराज शांतनु का महल फिर से अपने प्रचीनतम गौरव में दिखेगा।
धर्मराज युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम, नकुल और सहदेव की स्मृति को ताजा करने वाला पांडेश्वर मंदिर फिर से वह सम्मान पाएगा जो उसे मिलना चाहिए था। दानवीर कर्ण का मंदिर हो, भीष्म पितामह की जन्मकथा को जी रही बूढ़ी गंगा या अमृत कुआं सबके दिन अब बहुरेंगे। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है।
1949 में पंडित नेहरू ने रखा खा पुनरुद्धार की नींव का पत्थर
आजादी के बाद हस्तिनापुर की बदहाली का तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने संज्ञान में लिया। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने खुद 6 फरवरी 1949 को हस्तिनापुर के पुनर्निंर्माण कार्य का शिलान्यास किया था। इसके साक्षी के रूप में वह रशिलालेख अभी भी पार्क में मौजूद है। इस शिलालेख की उम्र अब सत्तर साल की हो गई है। इस बीच देश व प्रदेश में कई सरकारें आईं और गईं लेकिन हस्तिनापुर की पीड़ा की तरफ किसी ने नज़र डालने की जरूरत नही समझी।
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भाजपा एमएलसी यशवंत सिंह बिजनौर लोकसभा सीट पर चुनाव के दौरान अप्रैल 2019 में हस्तिनापुर गए थे। उन्होंने इस ऐतिहासिक नगरी की बदहाली को करीब से देखा था। उन्होंने संस्कृति, इतिहास और पत्रकारिता से जुड़े बुद्धिजीवियों का दल 25 दिसंबर को हस्तिनापुर भेजा। इसी दल की रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने 30 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भारत का गौरव रहे हस्तिनापुर की दुर्दशा को लेकर पत्र लिखा था।
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मुख्यमंत्री ने उनके खत को संज्ञान में लेते हुए पर्यटन विभाग और संस्कृति निदेशालय को हस्तिनापुर का गौरव बहाल करने के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश की जानकारी मिलने पर शनिवार को राजधानी में दारुलशफा स्थित चन्द्रशेखर चबूतरे पर मौजूद लोकतंत्र सेनानियों ने एमएलसी यशवंत सिंह को बधाई दी। हस्तिनापुर के लिए कार्ययोजना बनाने के सीएम योगी के फैसले पर मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया गया।
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यशवंत सिंह ने कहा कि प्रदेश को ऐसे मुख्यमंत्री मिले हैं जो संत हैं और जिनके दामन पर कोई दाग नहीं है। उनका जीवन देश और समाज कल्याण के लिए समर्पित है। हस्तिनापुर का कायाकल्प भी उन्हीं की नजर पड़ने से होने जा रहा है। उन्होंने जय हस्तिनापुर अभियान चलाने वालों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हस्तिनापुर में बदहाली का शिकार महाराज शांतनु का महल फिर से अपने प्रचीनतम गौरव में दिखेगा।
धर्मराज युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम, नकुल और सहदेव की स्मृति को ताजा करने वाला पांडेश्वर मंदिर फिर से वह सम्मान पाएगा जो उसे मिलना चाहिए था। दानवीर कर्ण का मंदिर हो, भीष्म पितामह की जन्मकथा को जी रही बूढ़ी गंगा या अमृत कुआं सबके दिन अब बहुरेंगे। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है।
1949 में पंडित नेहरू ने रखा खा पुनरुद्धार की नींव का पत्थर
आजादी के बाद हस्तिनापुर की बदहाली का तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने संज्ञान में लिया। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने खुद 6 फरवरी 1949 को हस्तिनापुर के पुनर्निंर्माण कार्य का शिलान्यास किया था। इसके साक्षी के रूप में वह रशिलालेख अभी भी पार्क में मौजूद है। इस शिलालेख की उम्र अब सत्तर साल की हो गई है। इस बीच देश व प्रदेश में कई सरकारें आईं और गईं लेकिन हस्तिनापुर की पीड़ा की तरफ किसी ने नज़र डालने की जरूरत नही समझी।