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नए साल में लगेगा बिजली का झटका
अनिल श्रीवास्तव/लखनऊ
Updated Mon, 28 Oct 2013 10:12 PM IST
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बिजली उपभोक्ताओं को अगले साल फिर तगड़ा झटका लगने की उम्मीद है।
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पावर कॉर्पोरेशन 2014-15 के लिए प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) व टैरिफ प्रस्ताव 30 नवंबर तक राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखा जाएगा।
एआरआर का आकार तो करीब-करीब तय है लेकिन दरों में वृद्धि को लेकर अधिकारी दुविधा में हैं।
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लोकसभा चुनाव के कारण इसे टाला भी जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक सभी श्रेणियों में औसतन आठ से दस फीसदी बढ़ोतरी की जा सकती है।
पावर कार्पोरेशन की नियामक आयोग संबंधी मामलों की इकाई (रेगुलेटरी अफेयर यूनिट) ने अगले साल की बिजली दरों को लेकर माथापच्ची शुरू कर दी है।
फिलहाल एआरआर का आकार तय करके मौजूदा दरों पर मिलने वाले राजस्व तथा संभावित वृद्धि से अनुमानित राजस्व का आकलन किया जा रहा है।
लगभग 40,000 करोड़ रुपये का एआरआर तैयार कराया जा रहा है। इसमें लगभग 25,000 करोड़ रुपये राजस्व वसूली को आधार मानते हुए दरों के निर्धारण की कसरत चल रही है।
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वित्तीय पुनर्गठन योजना (एफआरपी) में कंपनियों को घाटे से उबारने के लिए मुहैया कराई गई मदद की वजह से भी कार्पोरेशन पर बिजली दरें बढ़ाने का दबाव है।
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एफआरपी की शर्तों के अनुसार अगले तीन वर्षों में कार्पोरेशन को आपूर्ति की लागत और राजस्व के बीच के अंतर को समाप्त करना है, यानी दरें उस स्तर तक ले जाना है जितना उपभोक्ता तक पहुंचाने में खर्च आ रहा है।
मौजूदा समय में प्रति यूनिट औसत लागत लगभग छह रुपये आ रही है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं की अधिकतम दर 5.00 रुपये प्रति यूनिट है।
पावर कार्पोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि कोशिश की जा रही है कि इस बार निर्धारित समय सीमा 30 नवंबर तक 2014-15 का एआरआर नियामक आयोग को सौंप दिया जाए। टैरिफ प्रस्ताव के लिए आयोग से वक्त मांगा जा सकता है।