राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने की तारीफ, कहा- हमारे सपनों से भी आगे जा रही हैं बेटियां
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‘हमारे महापुरुष आधी आबादी के बारे में जो सपने देखते थे, आज हमारी बेटियां उससे कहीं आगे जा रही हैं। बाबा साहेब स्त्री-पुरुष समानता के पक्षधर थे, पर आज जो परिणाम सामने आ रहे हैं, उनमें बेटियां काफी आगे हैं। वे जितनी तेजी से बढ़ेंगी, राष्ट्र भी उतनी ही तेजी से आगे बढ़ेगा।’ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शुक्रवार को यहां बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी (बीबीएयू) के सातवें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
उन्होंने विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। राष्ट्रपति ने कहा कि लखनऊ की तहजीब में दूसरों के सम्मान की भावना कूट-कूट कर भरी है। यह प्रत्येक व्यक्ति को धैर्यशील होना सिखाती है। हालांकि कभी-कभी इसका परिहास भी उड़ाया जाता है, पर देश के सभी हिस्सों में लखनवी तहजीब को अपना लिया जाए तो आपसी व्यावहारिक समस्याएं पैदा ही न हों।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि हमारा देश आज दुनिया की अग्रिम पंक्ति में गिना जाता है, पर कई सामाजिक एवं आर्थिक पैमानों पर काम करते हुए हमें विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी देश को काफी आगे ले जाना है।
डॉ. बीआर अंबेडकर को याद करते हुए कोविंद ने कहा, वे बचपन से ही मेधावी थे। कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्होंने अमिट छाप छोड़ी। वे गंभीर अध्येता एवं उच्च कोटि के विद्वान थे, जिसके चलते ही उन्हें संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष चुना गया। डॉ. अंबेडकर का लखनऊ से गहरा रिश्ता था। उनके गुरु स्वामी बोधानंद और प्रज्ञानंद यहीं रहते थे।
कोविंद ने कहा, वर्ष 2002-03 में जब मैं राज्यसभा का सदस्य था, तब इस विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट का सदस्य भी था। तब यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर की काफी कमी थी। आज उस पौधे को विशाल वटवृक्ष के रूप में देखकर मुझे अपार खुशी हो रही है।
राष्ट्रपति ने 13 वर्ष की उम्र में एमएससी करने वाली सुषमा वर्मा और स्वामी विवेकानंद सिंगल गर्ल चाइल्ड फेलोशिप पाने वाली नीलू शर्मा की प्रशंसा करते हुए कहा, आज असाधारण प्रतिभा की धनी महिलाओं की मेरी सूची में इन बेटियों के नाम भी जुड़ गए हैं।
युवाओं से स्वरोजगार की ओर बढ़ने का आह्वान
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से कहा, आपके सामने अपने पैरों पर खड़े होने की चुनौती है। यह काम दो तरह से कर सकते हैं- नौकरी पाकर और खुद का काम शुरू करके। नौकरी में सीमा तय हो जाती है, पर अपने काम में सफलता की अपार संभावनाएं हैं और आगे बढ़ने की सीमाएं भी अनंत हैं। उन्होंने व्हाट्सएप के को-फाउंडर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें फेसबुक व ट्विटर ने नौकरी नहीं दी थी, बाद में फेसबुक को उनकी व्हाट्सएप कंपनी 1.20 लाख करोड़ रुपये में खरीदनी पड़ी।
नैतिक शास्त्र पर लागू नहीं होता सापेक्षता का सिद्धांत
राष्ट्रपति ने कहा, नौकरी हो या स्वरोजगार, नैतिक सिद्धांतों के रास्ते पर चलकर ही उनमें सफलता मिल सकती है। हमें नहीं भूलना चाहिए कि सापेक्षता का सिद्धांत भौतिकी पर लागू होता है, नैतिक शास्त्र पर नहीं। उन्होंने बीबीएयू के सामाजिक सरोकारों की तारीफ करते हुए कहा कि यह इकलौती संतान बेटी और गंभीर बीमार युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए काफी कुछ कर रहा है। इसने कुछ गांव भी गोद लिए हैं, जो किसानों को नवाचार सिखा रहे हैं।
एल्युमिनाई एसोसिएशन बनाने पर जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि यह नया विश्वविद्यालय है। अंतररष्ट्रीय संस्थानों की बेस्ट प्रैक्टिसेज को अभी से अपनाकर आप 21वीं सदी की जरूरतों को पूरा करने में समर्थ हो पाएंगे। ऐसा ही काम है एल्युमिनाई एसोसिएशन बनाना और पूर्व छात्रों को विश्वविद्यालय से जोड़कर रखना। उम्मीद है कि विभिन्न क्षेत्रों में सफल हो चुके यहां के पूर्व छात्र मौजूदा छात्रों को जरूर अपना सहयोग देंगे। डॉ. अंबेडकर के नाम पर स्थापित इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थी समानता एवं न्याय पर आधारित समाज के निर्माण में योगदान देते रहेंगे।