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एपीएम का पदनाम लिखने वाली तीन डीपीओ को मुख्यालय से हटाने की तैयारी
Mon, 27 Jul 2020 01:00 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 27 Jul 2020 01:00 PM IST
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सीएम योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार (आईसीडीएस) निदेशालय में तैनात होकर अनधिकृत रूप से अपर परियोजना प्रबंधक (एपीएम) का पदनाम लिखने वाली तीन डीपीओ को मुख्यालय से हटाने के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री कार्यालय ने मंजूरी दे दी है। इसके अलावा महिला सहयोगी का यौन शोषण करने के आरोपी डीपीओ के साथ ही दो दर्जन से अधिक बाबुओं की भी मुख्यालय से छुट्टी की जाएगी।
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निदेशालय में वर्षों से तैनात डीपीओ आरुति यादव, सरस्वती सरोज और लिलि सिंह एपीएम का पदनाम लिख रही हैं, जबकि निदेशालय में यह पद ही नहीं है। शासन की ओर से कई बार मना करने और चेतावनी के बावजूद उनमें कोई सुधार नहीं आया। ‘अमर उजाला’ में इसका खुलासा होने पर शासन ने तीनों को मुख्यालय से हटाने का निर्देश दिया था।
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इसी तरह कानपुर में तैनाती के दौरान डीपीओ मोहम्मद जफर खान पर एक महिला सहयोगी ने यौन व मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद जफर को मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। सूत्रों के मुताबिक जफर खान को भले ही मुख्यालय से संबद्ध कर दिया हो, लेकिन उनको ड्राइंग डिस्पर्स ऑफिसर (डीडीओ) का चार्ज अपने ही पास रखा है। इस दौरान जफर ने कई बिलों का भुगतान भी किया है। यह वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।
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दो दर्जन से अधिक बाबुओं के तबादले को भी हरी झंडी
आईसीडीएस निदेशालय में पिछले 15-20 वर्षों से जमे बाबुओं के तबादले के प्रस्ताव को भी मुख्यमंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिल गई है। सूची के आधार पर 26 प्रधान सहायकों का तबादला लगभग तय है। संभावना है कि एक-दो दिन में आदेश जारी कर दिया जाएगा।