दो शिफ्टों में ओपीडी चलाने की तैयारी, तैयार किया जा रहा प्रस्ताव: सिद्धार्थनाथ सिंह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को उपचार की बेहतर सुविधा देने के लिए दो शिफ्टों में ओपीडी चलाने की तैयारी है। कैबिनेट की मंजूरी के लिए इस बाबत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने सोमवार को विधानसभा में यह जानकारी दी।
कांग्रेस की अदिति सिंह के सवाल के जवाब में सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि सरकार सैद्धांतिक रूप से दो शिफ्टों में ओपीडी शुरू करने पर सहमत है। सीएम से बात हो गई है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, कानपुर ने मंगलवार से शनिवार तक शाम 4 से शाम 6 बजे के बीच विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं देने का प्रस्ताव दिया है। लेकिन इन चिकित्सकों के मानदेय पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।
अदिति सिंह ने कहा कि वह दो शिफ्टों में ओपीडी शुरू करने की समय सीमा पूछ रही थीं। कांग्रेस के अजय लल्लू ने कहा कि क्या इसी सरकार के रहते कैबिनेट में प्रस्ताव आ जाएगा? वहीं, बसपा के उमाशंकर सिंह ने जानना चाहा कि क्या दो शिफ्टों में ओपीडी के बावजूद मरीजों को समुचित सुविधाएं दी जा सकेंगी, जिससे उन्हें इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, डॉक्टरों और मरीजों का अनुपात बना रहे, इसलिए नई व्यवस्था की जा रही है। डॉक्टरों की संख्या कम है और हम बढ़ा नहीं पा रहे हैं।
इसी दौरान सपा के संग्राम सिंह ने आजमगढ़ में रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं होने का सवाल पूछना चाहा। इस पर संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने दो शिफ्ट में ओपीडी का प्रस्ताव विचाराधीन होने की बात कही है। इसके बाद कोई प्रश्न नहीं होना चाहिए क्योंकि जब मंत्री ने संकेत दे दिया कि इसकी प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं तो फिर किसी प्रश्न की आवश्यकता ही नहीं है।
10 पीएचसी व 18 सीएचसी नहीं हो रहे संचालित
स्वास्थ्य मंत्री ने सपा के मनोज पांडेय के प्रश्न के जवाब में कहा, प्रदेश में 10 पीएचसी व 18 सीएचसी की बिल्डिंग बनकर तैयार है, लेकिन स्टाफ की नियुक्ति नहीं होने से ये संचालित नहीं हो पा रहे हैं। इनका संचालन मानव एवं वित्तीय संसाधन की उपलब्धता पर निर्भर है।
मनोज पांडेय ने जानना चाहा कि मौजूदा पीएचसी व सीएचसी पर भी मानक के अनुरूप स्टाफ नहीं है। इन पर कब तक स्टाफ उपलब्ध करा दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि 18,382 पद सृजित हैं और वर्ष 2012 के बाद 11 हजार पद भरे गए हैं।
पिछले 70 सालों में 13 मेडिकल कॉलेज थे। योगी सरकार में 13 नए मेडिकल कॉलेज बने हैं। जब मेडिकल कॉलेज ही नहीं थे, तब डॉक्टर कहां से आते? इस पर नेता प्रतिोपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा, विपक्ष को सही उत्तर नहीं मिल रहा है।