लखनऊः पीजीआई में न्यूरो साइंस सेंटर बनाने की तैयारी, 600 बीमारियों का हो सकेगा इलाज
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संजय गांधी पीजीआई में न्यूरो साइंस सेंटर बनाने की तैयारी है। इससे न्यूरो से जुड़ीं 600 बीमारियां का एक ही छत के नीचे इलाज हो सकेगा। खास तौर से बच्चों में होने वाली न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का हल निकलेगा। उन्हें विभागों में चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सेंटर से छह विभाग जोड़े जाएंगे। इसे एम्स, नई दिल्ली की तर्ज पर विकसित करने की कार्ययोजना है।
एसजीपीजीआई में न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, रेडियोलॉजी, रेडियोडायग्नोसिस, पैथोलॉजी, पेन क्लीनिक विभाग स्वतंत्र रूप में चल रहे हैं। मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों में न्यूरोलॉजी और न्यूरो सर्जरी के साथ दूसरे विभागों की भी जरूरत पड़ती है। मिर्गी, पार्किंसन, माइग्रेन, न्यूरो एड्स, ब्रेन टीबी, तंत्रिका कोशिकाओं (स्क्लेरोसिस), संज्ञानात्मक विकार में दोनों विभागों की जरूरत पड़ती है।
इसी तरह ब्रेन ट्यूमर और ब्रेन से जुड़ी अन्य सर्जरी में इन दोनों विभागों के साथ रेडियोलॉजी व रेडियोडायग्नोसिस की भूमिका अहम होती है। ऐसी में न्यूरो साइंस सेंटर बनने से मरीजों को एक ही स्थान पर सभी विशेषज्ञ देख सकेंगे। अभी तक इन बीमारियों में दूसरे विभाग के विशेषज्ञ की जरूरत पड़ने पर बुलावा पत्र भेजा जाता है। न्यूरो साइंस सेंटर होने से वे रोजाना मरीजों को देखेंगे।
चिकित्सा शिक्षा को भी मिलेगा फायदा
न्यूरो साइंस सेंटर बनने से प्रशिक्षण ले रहे मेडिकल छात्रों को भी लाभ होगा। इसमें प्रशिक्षित होने वाले जूनियर डॉक्टर संबंधित बीमारियों के मामले में पूरी तरह से पारंगत होंगे। उन्हें दूसरे विभाग के विशेषज्ञ से मशविरा नहीं लेना पड़ेगा। इस सेंटर के बनने से पीजी की सीटें भी बढ़ जाएंगी। न्यूरो के क्षेत्र में शोध को भी बढ़ावा मिलेगा। इसे ध्यान में रखते हुए पीजीआई की टीम इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में लगी है। इसे जल्द शासन को भेजा जाएगा। वहां से मुहर लगते ही इसे शुरू कर दिया जाएगा।
मरीजों के साथ छात्र भी उठाएंगे लाभ
न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय बेहारी ने कहा कि पीजीआई में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड और नेपाल के भी न्यूरोलॉजिकल मरीज आते हैं। इनमें ज्यादातर गंभीर होते हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल इलाज की जरूरत होती है। न्यूरोलॉजिकल डिस्ऑर्डर और मूवमेंट डिस्ऑर्डर में 600 से ज्यादा बीमारियां हैं। ऐसे में इनके इलाज को एक टीम की जरूरत पड़ती है। नई दिल्ली के एम्स की तर्ज पर न्यूरो साइंस सेंटर बनने से करीब पांच राज्यों के लोगों को लाभ मिलेगा।
गंभीर बीमारियों का मिलेगा तुरंत इलाज
पीजीआई में पिछले सप्ताह पार्किंसन के मरीज में डीप ब्रेन स्टिमुलेशन तकनीक से सर्जरी की गई है। प्रो. बेहारी ने बताया कि पीजीआई में पहली बार पार्किंसन के मरीज में इस तकनीक का प्रयोग किया गया। इसकी सफलता में न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, रेडियोलॉजी, रेडियोडायग्नोसिस, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, एनेस्थीसिया, पेन क्लीनिक का संयुक्त प्रयास था।
न्यूरो साइंस सेंटर भी ऐसा ही होता है। इसमें न्यूरो से जुड़े सभी विशेषज्ञ रहते हैं। इससे गंभीर बीमारियों का तुरंत इलाज किया जा सकता है। इसे ध्यान में रखकर प्रोजेक्ट को तैयार किया जा रहा है।