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हल्के में न लें बेहद खतरनाक हे ये जहरीली धुंध, जानें बचाव के तरीके

Tue, 08 Nov 2016 07:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 08 Nov 2016 07:37 PM IST
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precautions to reduce effect of smog
धुंध - फोटो : amar ujala

शहर के ऊपर आसमान में छाई जहरीली धुंध को सर्दी की शु़रुआत और कोहरा समझ कर सैर करने या पिकनिक पर जाने का मूड कतई न बनाएं। डॉक्टरों का कहना है कि इन दिनों थोड़ी सी भी भागदौड़ आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है। 

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कोशिश करें कि कम से कम बाहर निकलें जिससे वातावरण में फैले जहरीले कण सांस के जरिए आपके शरीर में न जाने पाएं। डॉक्टरों का तो यहां तक कहना है कि धुंध में मौजूद सूक्ष्म कण ब्रेन तक पहुंचकर व्यक्ति की जान के लिए भी खतरा बन सकते हैं। बच्चों और बुजुर्गो को विशेष देखभाल की जरूरत है।
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शहर में फैली धुंध की चादर शहरवासियों के सेहत के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। गोमतीनगर के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के फिजिशियन डॉ. संदीप चौधरी बताते हैं कि स्मॉग प्रदूषित सूक्ष्म कणों की एक परत (लेयर) है जो ऊपर नहीं उठ रही। यह बहुत निचले स्तर पर यह वातावरण में जमा है। 
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वो बताते हैं कि हवा में मौजूद कॉर्बन पार्टिकल्स सांस के जरिए शरीर में जाते हैं जिससे समस्या शुरू होने लगती है। डॉ. संदीप के मुताबिक धुंध के बीच मौजूद सबसे सूक्ष्म कण जिसे पार्टिकुलेट मैटर कहा जाता है श्वांस नलिका से खून में मिलने के बाद दिमाग तक पहुंच सकता है। 

बच्चों को रखें बचाकर

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डेमो प‌िक - फोटो : amar ujala

दिमाग में इसके पहुंचते ही संक्रमण होने लगेगा और व्यक्ति के सिर में असहनीय दर्द के साथ चक्कर, झुंझलाहट के साथ घबराहट की समस्या होने लगेगी। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में एयर क्वालिटी इंडेक्स 500 तक पहुंच गया है। 

स्मॉग की चपेट में आने के बाद व्यक्ति की सेहत तेजी से गिरती है। वो कहते हैं कि स्मॉग की चपेट में आने के बाद ब्रांकाइटिस, अस्थमा और सीने में संक्रमण के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। 

जिन लोगों को ऐसी समस्या पहले से है उनकी परेशानी तीन से चार गुना बढ़ जाएगी। डफरिन अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान खान बताते हैं कि बच्चों की की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से स्मॉग उन्हें ज्यादा प्रभावित करता है। इसलिए बच्चों को बाहर निकलने से बचाना ही होगा।

ब्रेथ अटैक का खतरा

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डेमो प‌िक - फोटो : getty images
केजीएमयू के पल्मोनरी विभाग के डॉ. वेद प्रकाश बताते हैं कि वातावरण में फैले सूक्ष्म प्रदूषित कण श्वांस नलिका को सिकोड़ देते हैं। 

इससे श्वास नलिका की कई शाखाएं काम करना बंद कर देती हैं और ब्रेथ अटैक का खतरा बढ़ जाता है। स्मॉग के बीच निकलने वाले लोगों को इसका खतरा अधिक है। गंभीर परिस्थिति में सांस अचानक रूक भी सकती है। ऐसे में सावधानी के साथ जरूरी एहतियात बरतें और स्मॉग में निकलने से बचें।

डॉ. संदीप की मानें तो आने वाले दो से तीन दिन बेहद अहम हैं। हालात इसी तरह रहे और स्मॉग बरकरार रहा तो श्वास रोगियों की संख्या में इजाफा हो सकता है। 

इसके चलते अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ उमड़नी तय है जिसे संभालना चुनौतीपूर्ण होगा। लोहिया संस्थान के एक डॉक्टर बताते हैं कि स्मॉग से जल्द राहत नहीं मिली तो हालात महामारी की तरह हो जाएंगे। 

जानें लक्षण और बचाव

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डेमो प‌िक - फोटो : amar ujala

बलरामपुर अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि स्मॉग में मौजूद छोटे कण आंखों की भीतरी परत को नुकसान पहुंचाते हैं। जिससे जलन और आंसू आने लगता है और आंख लाल हो जाती है। इससे बचाने के लिए चश्मा लगाने के साथ जब मौका मिले पानी से मुंह धोना चाहिए और पानी की छींटा आंख में मारना चाहिए जिससे प्रदूषित कण निकल जाएं। खुद से किसी दवा का इस्तेमाल कतई न करें। जिन मरीजों की आंख का ऑपरेशन हुआ है वह ऐसे मौसम में कतई बाहर न निकलें। पट्टी खुलने के बाद प्रदूषण के कण से आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा है।

ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क
- सांस लेने में तकलीफ बढ़ना।
- थकान के साथ अधिक आलस।
- सांस का फूलना, अधिक कमजोरी होना।
- चक्कर के साथ झुंझलाहट महसूस होना।
- आंखों में जलन के साथ दर्द होना।
- आंखों से पानी आना, देखने में दिक्कत।
- सिर में दर्द और काम में मन न लगना।

एहतियात से करें बचाव
- खुले वातावरण में कम से कम निकलें।
- सांस लेने में तकलीफ हो तो डॉक्टर से मिलें।
- आंखों में जलन होने पर डॉक्टरी परामर्श लें।
- सांस के पुराने रोगी कतई लापरवाही न बरतें।
- बच्चों को बाहर खेलने न जाने दें।
- पार्क में टहलने-घूमने से परहेज करें।
- नवजात बच्चों को बाहर ले जाने से बचें।
- मास्क का इस्तेमाल करें।

काढ़े से बढ़ाएं प्रत‌िरोधक क्षमता

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डेमो पिक - फोटो : getty images

बीएचयू के काय चिकित्सा विभाग के डॉ. केएन मूर्ति बताते हैं कि स्मॉग से बचाव के लिए हमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ानी होगी। 

इसके लिए पौष्टिक आहार के साथ शिरिष, तुलसी, गिलोय और हल्दी का काढ़ा पिएं। इन चारों तत्वों को 400 मिली. पानी में पिलाकर तब तक उबालें जब तक पानी एक चौथाई (100 मिली.) न रह जाए। 

इसे छान लें और 50-50 मिली. सुबह शाम पिएं। इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होगी और शरीर पर स्मॉग से संक्रमण का खतरा 99 फीसदी कम हो जाएगा।

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