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Lucknow News: विश्व शांति के लिए प्रार्थना की
Mon, 24 Feb 2025 01:24 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Mon, 24 Feb 2025 01:24 AM IST
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जेतवन में प्रार्थना करते वियतनाम से आए अनुयायी। संवाद
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को अनुयायियों से गुलजार रही। वियतनाम से 42 सदस्यीय दल रविवार को बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचा। दल के सदस्यों ने भिक्षु भंवरानंद के नेतृत्व में जेतवन परिसर में विश्व शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान बुद्धम शरणम गच्छामि के उद्घोष से तपोस्थली गुंजायमान रही।
पूजा के दौरान भिक्षु भंवरानंद ने कहा कि भगवान बुद्ध के धर्म प्रचार से बौद्ध भिक्षुओं की संख्या दुनिया में बढ़ने लगी। बड़े-बड़े राजा व महाराजा भी उनके शिष्य बनने लगे। शुद्धोधन और राहुल ने भी बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। भिक्षुओं की संख्या बहुत बढ़ने पर बौद्ध संघ की स्थापना की गई।
कहा कि भगवान बुद्ध ने लोक कल्याण के लिए बौद्ध धर्म का देश-विदेश में प्रचार करने के लिए बौद्ध भिक्षुओं को इधर-उधर भेजा। सम्राट अशोक आदि ने भी विदेशों में बौद्ध धर्म के प्रचार में अहम भूमिका निभाई। मौर्य काल आते-आते भारत से निकलकर बौद्ध धर्म चीन, जापान, कोरिया, मंगोलिया, वर्मा, थाईलैंड, हिंद चीन व श्रीलंका आदि देशों में भी फैल चुका था।
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इन देशों में बौद्ध धर्म के अनुयायी ज्यादा हैं। पूजन के बाद सभी उपासकों ने कच्ची कुटी, पक्की कुटी, अंगुलिमाल स्तूप व ओड़ाझार आदि का भ्रमण किया। इस मौके पर काफी संख्या में उपासक व उपासिकाएं मौजूद रहीं।
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पूजा के दौरान भिक्षु भंवरानंद ने कहा कि भगवान बुद्ध के धर्म प्रचार से बौद्ध भिक्षुओं की संख्या दुनिया में बढ़ने लगी। बड़े-बड़े राजा व महाराजा भी उनके शिष्य बनने लगे। शुद्धोधन और राहुल ने भी बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। भिक्षुओं की संख्या बहुत बढ़ने पर बौद्ध संघ की स्थापना की गई।
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कहा कि भगवान बुद्ध ने लोक कल्याण के लिए बौद्ध धर्म का देश-विदेश में प्रचार करने के लिए बौद्ध भिक्षुओं को इधर-उधर भेजा। सम्राट अशोक आदि ने भी विदेशों में बौद्ध धर्म के प्रचार में अहम भूमिका निभाई। मौर्य काल आते-आते भारत से निकलकर बौद्ध धर्म चीन, जापान, कोरिया, मंगोलिया, वर्मा, थाईलैंड, हिंद चीन व श्रीलंका आदि देशों में भी फैल चुका था।
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इन देशों में बौद्ध धर्म के अनुयायी ज्यादा हैं। पूजन के बाद सभी उपासकों ने कच्ची कुटी, पक्की कुटी, अंगुलिमाल स्तूप व ओड़ाझार आदि का भ्रमण किया। इस मौके पर काफी संख्या में उपासक व उपासिकाएं मौजूद रहीं।