प्रतीक यादव के सिमकार्ड की फाइल बीएसएनएल से गायब
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कुछ ही दिनों पहले लखनऊ पुलिस ने एक बड़े ठग रामशंकर शाक्य को दबोचा था। ये ठग यूपी में मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव बनकर लोगों को चूना लगाता था। इसने प्रतीक यादव के नाम पर ही सिमकार्ड भी इश्यू करवा रखा था। प्रतीक यादव के नाम का सिमकार्ड इस जालसाज के पास कैसे पहुंचा इस बात की छानबीन करने के लिए जब पुलिस पहुंची तो एक बड़ा खुलासा हुआ।
प्रतीक यादव के नाम से लिए गए सिमकार्ड की फाइल बीएसएनएल के भदेवा स्थित वेयरहाउस से गायब हो गई है। इस फाइल में सिमकार्ड लेते वक्त भरा गया फॉर्म,प्रतीक यादव के वोटर आईडी कार्ड की फोटोकॉपी,एक शपथपत्र और दो फोटो सहित अन्य कागजात थे। बृहस्पतिवार को साइबर सेल की एक टीम बीएसएनएल के महानगर स्थित ऑफिस पहुंची तो यह खुलासा हुआ। फाइल कहां गई?इसके बारे में कोई अफसर जानकारी नहीं दे पा रहा है।
सीओ हजरतगंज अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि सिमकार्ड महानगर स्थित टेलीफोन एक्सचेंज के ऑफिस से जारी हुआ था लेकिन दस्तावेज भदेवा स्थित बीएसएनएल के वेयरहाउस में सुरक्षित रखे जाते हैं। उन्होंने बताया कि साइबर सेल की एक टीम भदेवा भेजी गई थी जहां से सारे रिकॉर्ड गायब मिले।
वीआईपी सिमकार्ड की फाइल हुई गायब
सीओ का कहना है कि वीआईपी सिमकार्ड से संबंधित फाइल गायब होने के बारे में बीएसएनएल के अफसरों से भी पूछताछ की जाएगी। सिमकार्ड जारी करने की फाइलों की देखरेख कौन करता है? कौन-कौन से अफसर इसके लिए जिम्मेदार हैं? इस बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
सीओ ने बताया कि जालसाज रामशंकर शाक्य के कर्मचारी सतीश शुक्ला ने ही एक साल पहले उसे प्रतीक यादव के नाम से बीएसएनएल का वीआईपी सिमकार्ड दिलाया था।
प्रतीक के नाम से जारी मोबाइल नंबर मई 2014 में एटिक्वेट हुआ है। हालांकि, यह नंबर 2007 से ही चल रहा था। इससे पहले यह नंबर किसी तिवारी के पास था। उनके सरेंडर करने के बाद सतीश शुक्ला ने प्रतीक यादव की फर्जी आईडी बनाकर शाक्य को इसी नंबर का नया सिमकार्ड दिला दिया।
पहले बीएसएनएल में गार्ड था शाक्य का कर्मचारी
सीओ के मुताबिक शाक्य का कर्मचारी सतीश शुक्ला पहले पीके भवन स्थित बीएसएनएल कार्यालय में सिक्योरिटी गार्ड था। वह सिम लेने आए लोगों से उनकी आईडी लेकर सिमकार्ड बांटने का काम भी करता था।
2011 में पीके भवन से कार्यालय जीपीओ में शिफ्ट हो गया तो गार्ड वहां से भदेवा स्थित वेयरहाउस चला गया। हालांकि, कुछ दिन बाद सतीश ने वहां नौकरी छोड़ दी और शाक्य से जुड़ गया। वह शाक्य के कसमंडा हाउस के भूतल स्थित फ्लैट में चल रहे ट्रस्ट के ऑफिस में गार्ड बन गया।
साइबर सेल की पड़ताल में अब तक ठग रामशंकर शाक्य के चार अकाउंट मिल चुके हैं। हालांकि,सभी अकाउंट में नाममात्र रुपये ही मिले हैं। सीओ हजरतगंज का कहना है कि ठग ने रकम को कहीं इनवेस्ट कर दिया होगा या किसी और के पास रखवा दिया होगा। ठग की संपत्तियों के बारे में भी जानकारी एकत्र की जा रही है। अगर उसने ठगी की रकम से चल-अचल संपत्ति जुटाई है तो उसे सीज किया जाएगा।