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प्राण प्रतिष्ठा: मुख्य यजमान अनिल मिश्र 10 दिन कुश पर सोएंगे, मिलेगा सात्विक भोजन, नहीं पहनेंगे सिले वस्त्र

Tue, 16 Jan 2024 09:38 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला संवाद, अयोध्या
अमर उजाला संवाद, अयोध्या Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 16 Jan 2024 09:38 PM IST
सार

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य यजमान पीएम नरेंद्र मोदी ना होकर डॉ. अनिल मिश्र होंगे। प्राण प्रतिष्ठा तक वह संयमित जीवन में रहेंगे। 

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Pran Pratistha: Chief host Anil Mishra will sleep on Kush, will get satvik food
मुख्य यजमान डा.अनिल मिश्र को दस विधि स्नान कराते काशी के वैद्यिक आचार्य। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य यजमान डॉ़ अनिल मिश्र 11 दिनों तक नियम-संयम का पालन करेंगे। वे दस दिनों तक सिला हुआ सूती वस्त्र नहीं पहनेंगे। स्वेटर, ऊनी शॉल, कंबल धारण कर सकेंगे। केवल फलाहार करेंगे। रात्रि आरती के बाद सात्विक भोजन, सेंधा नमक का इस्तेमाल करेंगे। जमीन पर कुश के आसन पर सोएंगे। अन्य कई कठोर नियमों का उन्हें पालन करना होगा। उन्होंने यह नियम-संयम मकर संक्रांति से शुरू भी कर दिया है।

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प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य यजमान का सौभाग्य प्राप्त करने वाले डॉ.अनिल मिश्र श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य हैं। वे 1979 से संघ से जुड़े हुए हैं। मूलरूप से अंबेडकरनगर के ग्राम पतोना निवासी हैं। जौनपुर के पीडी बाजार स्थित जयहिंद इंटर कॉलेज से माध्यमिक स्तर की पढ़ाई की। फिर डॉ. बृजकिशोर होम्योपैथिक कॉलेज में पढ़ने फैजाबाद आ गए। डॉक्टरी की पढ़ाई में कुछ दिन ही बीते थे कि होम्योपैथी को एलोपैथी के समानांतर प्रतिष्ठा दिलाने का आंदोलन छिड़ गया। अनिल मिश्र भी आंदोलन में कूद पड़े, जिसके चलते उन्हें जेल तक जाना पड़ा।
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यह उस दौर की बात है, जब देश आपातकाल में जकड़ चुका था। बंदी जीवन के ही दौरान अनिल मिश्र भी संघ के संपर्क में आए। फिर क्या, उन्हीं से प्रेरित होकर डॉ. मिश्र ने भी अपना जीवन संघ को समर्पित करने की ठानी। मेडिकल की लड़ाई के चलते आठ माह बाद जेल से छूटे तो जीवन पूरा बदल चुका था। अब वे कॅरियर की बजाय राष्ट्र के लिए जीने की सोचने लगे। हालांकि, उन्होंने होम्योपैथी की पढ़ाई जारी रखी, लेकिन केंद्र में संघ कार्य ही रहा। दोहरी जिम्मेदारी के बीच 1981 में उन्होंने होम्योपैथी से स्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली। नगर शाखा कार्यवाह और मुख्य शिक्षक की भूमिका में प्रभावी छाप छोड़ी। इस बीच चिकित्सा अधिकारी के तौर पर वह शासकीय सेवा में चयनित हो गए।

चिकित्सक की भूमिका में प्रभावी मौजूदगी दर्ज कराने वाले डॉ. मिश्र शहर में संघ के प्रतिनिधि के तौर पर स्थापित हुए। दो दशक पूर्व संघ में अवध प्रांत का गठन होने के साथ उन्हें प्रांतीय सह कार्यवाह का दायित्व सौंपा गया। 2005 में जब प्रांत कार्यवाह के चुनाव की बेला आई, तो डॉ. मिश्र सबकी पसंद बनकर उभरे। वे होम्योपैथी मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार भी रहे।

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