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प्रजापति का प्रमोशन, सपा का चुनावी स्टंट
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 19 Jul 2013 05:32 PM IST
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प्रजापति के रूप में सपा ने प्रदेश में कुम्हार, प्रजापति के रूप 4 से 5 प्रतिशत आबादी को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की है। साथ ही 17 अन्य अति पिछड़ी जातियों को सपा के भीतर जुटान बढ़ाने की भी कोशिश की है।
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स्पष्ट है कि सपा के रणनीतिकार अलग-अलग जातियों के रूप में मौजूद 15-20 प्रतिशत अति पिछड़ों को लोकसभा चुनाव में साइकिल पर सवार कराकर सूबे में अन्य राजनीतिक दलों को पीछे छोड़ना चाहते हैं।
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इन जातियों को रिझाने की कोशिश
गायत्री प्रजापति पिछले वर्ष सपा के सत्तारूढ़ होने के बाद से ही राजभर, निषाद, मल्लाह, कहार, कश्यप, कुम्हार, धीमर, बिंद, प्रजापति, धीवर, भर, केवट, बाथम, मछुआ, तुरहा, मांझी, गौंड, नाई सहित कई अति पिछड़ी जातियों की सुविधाएं बढ़ाने का अभियान चला रहे हैं।
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वे बीती फरवरी में सपा मुख्यालय पर इन जातियों का सम्मेलन भी कर चुके हैं। प्रजापति जिन जातियों को लेकर सम्मेलन कर चुके हैं।
प्रजापति का कद बढ़ाकर सपा ने इन जातियों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि लोकसभा चुनाव में उनके वोट से अगर सपा की ताकत बढ़ी तो इन जातियों के लिए सुविधाएं और बढ़ाई जाएंगी।
राहुल को मिलेगी चुनौती
प्रजापति को स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री बनाकर सपा सुप्रीमो ने कांग्रेस के युवा चेहरे राहुल गांधी को भी उनके घर में ही चुनौती देने की कोशिश की है।
कोशिश यह बताने की भी है कि कांग्रेस ने सपा की अनदेखी की तो वह अमेठी में वोटों की गोलबंदी करके उनके लिए मुसीबत खड़ा कर सकती है।
सपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि सूबे में कोई ऐसा लोकसभा क्षेत्र नहीं होगा, जहां अति पिछड़ी जातियों के 20 से 30 हजार वोट न हों।
प्रजापति जिस अति पिछड़े वोटों की गोलबंदी में जुटे हैं, वह वोट सपा मुखिया के एजेंडे में पहले से ही शामिल रहा है।
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर इन जातियों को दलितों का दर्जा देने के मुद्दे को हवा देकर राजनीतिक लाभ उठाने की चाल चली है।