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खुशखबरी: सरकार का इंकार, महंगी नहीं होगी बिजली

Wed, 18 Nov 2015 11:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 18 Nov 2015 11:52 PM IST
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Power prices not to go high.

प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। अगले साल बिजली दरों में इजाफा नहीं होगा। हालांकि, पावर कॉर्पोरेशन ने सभी श्रेणियों की दरों में औसतन 10 फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव तैयार कराया है, पर सरकार ने बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी देने से इन्कार कर दिया है। ऐसे में पावर कॉर्पोरेशन अन्य विकल्प तलाशने में जुट गया है।

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पावर कॉर्पोरेशन राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष दाखिल किए जाने वाले वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में जुटा है। टैरिफ प्रस्ताव दाखिल करने के बारे में फैसला बाद में होगा।
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पावर कॉर्पोरेशन को राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष वर्ष 2016-17 के लिए एआरआर और टैरिफ प्रस्ताव 30 नवंबर तक दाखिल करना है। कॉर्पोरेशन ने अगले साल के लिए 50 हजार करोड़ से ज्यादा का एआरआर तैयार कराया।
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इसमें ग्रामीण एवं कृषि उपभोक्ताओं को रियायती बिजली के एवज में शासन की ओर से मिलने वाली लगभग 5500 करोड़ रुपये की सब्सिडी भी शामिल की गई है।

अगले साल के एआरआर में करीब 7000 करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान है। लिहाजा वित्तीय पुनर्गठन योजना की शर्तों के अनुसार पावर कॉर्पोरेशन ने सभी श्रेणियों में औसतन 10 फीसदी की बढ़ोतरी प्रस्तावित की।

3500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व की होगी वसूली

Power prices not to go high.

कॉर्पोरेशन का अनुमान है कि इससे लगभग 3500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राजस्व वसूली होगी। बाकी घाटे की भरपाई को कॉर्पोरेशन ने अपनी आमदनी बढ़ाने, दक्षता में सुधार के साथ ही लाइन हानि में करीब दो से पांच फीसदी की कमी करने की बात भी कही। प्रस्ताव में घरेलू बिजली की दरों में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी शामिल है।

चुनावी साल में जोखिम नहीं लेने के मूड में सरकार

पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने नियामक आयोग के समक्ष टैरिफ प्रस्ताव दाखिल करने से पहले विभागीय मंत्री के रूप में हरी झंडी लेने के लिए मुख्यमंत्री के पास भेजा था।

भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि प्रस्ताव देखने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पावर कॉर्पोरेशन के अफसरों से दो टूक कह दिया कि बिजली दरें न बढ़ाई जाएं। बल्कि घाटे की भरपाई के लिए अन्य विकल्प तलाशे जाएं।

पावर कॉर्पोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि 2016-17 के लिए तय की जाने वाली दरें ही विधानसभा चुनाव के दौरान प्रभावी रहेंगी, इसलिए सरकार दरें बढ़ाकर विरोधियों को मुद्दा बनाने का मौका देने का जोखिम नहीं उठाना चाहती है।

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