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बिजली कंपनियों के खिलाफ आक्रोश, घटेंगी दरें!

Fri, 17 Apr 2015 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 17 Apr 2015 12:26 AM IST
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Power price to go down in UP.

राज्य विद्युत नियामक आयोग पर बिजली दरों में कमी करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। चालू वित्त वर्ष के लिए प्रस्तावित बिजली दरों के प्रस्ताव पर जनसुनवाई के दौरान बिजली कंपनियों की मनमानी को लेकर लोगों की नाराजगी का आयोग ने संज्ञान लिया है।

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आयोग का मानना है कि बिजली कपंनियों के कामकाज से लोगों में नाराजगी है और उपभोक्ताओं को कंपनियां बेहतर सेवा देने में नाकाम साबित हो रही हैं।

ऐसे में दरों में इजाफा करके आयोग लोगों की नाराजगी मोल लेने तथा यह संदेश देने के पक्ष में कतई नहीं है कि वह उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी की जा रही है।
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बिजली दरों के प्रस्ताव पर अब तक सीतापुर व गाजियाबाद में जनसुनवाई हुई है। दोनों ही जनसुनवाई काफी हंगामेदार रही और लोगों की नाराजगी से पुलिस तक बुलानी पड़ी। अगली जनसुनवाई 21 को उरई तथा 27 अप्रैल को गोरखपुर में प्रस्तावित है। पहली दो जनसुनवाई में ही जिस तरह से उपभोक्ताओं का उबाल नजर आया उससे आयोग पर दरें न बढ़ाने का दबाव काफी बढ़ गया है।

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मिला बिजली कंपनियों के कामकाज का सही फीडबैक

Power price to go down in UP.

आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस बार छोटे शहरों में जनसुनवाई का मकसद यही था कि दूर-दराज के उपभोक्ताओं को भी अपनी बात रखने का मौका मिले और बिजली कंपनियों के कामकाज पर सही फीडबैक पता चल सके।

छोटे शहरों में घरेलू व कॉमर्शियल उपभोक्ताओं के साथ-साथ किसान भी तार्किक ढंग से अपनी बात रख रहें है और दरें न बढ़ाने के लिए मजबूती से दलील पेश कर रहे हैं।

सीतापुर व गाजियाबाद में दरों में प्रस्तावित वृद्धि का विरोध करने के साथ-साथ अलग से वसूले जा रहे रेग्युलेटरी सरचार्ज को समाप्त करने, बिजली कंपनियों के मनमाने ढंग से उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाने, अनाप-शनाप पेनल्टी वसूलने समेत अन्य मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाते हुए इस पर अंकुश लगाने की मांग की गई।

दोनों जनसुनवाई में लोगों का कहना था कि जब पर्याप्त बिजली नहीं दी जा रही है तो दरें बढ़ाने का औचित्य क्या है?

500 से ज्यादा आपत्तियां मिली

Power price to go down in UP.

छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर हो वाली अघोषित बिजली कटौती को लेकर भी कंपनियों को घेरा गया। सूत्रों के मुताबिक जनसुनवाई में बिजली दरों में कमी के लिए आयोग के समक्ष 500 से ज्यादा आपत्तियां आई हैं।

आयोग के अधिकारियों का कहना है कि बिजली कंपनियों के कामकाज को लेकर जिस तरह से सवाल खड़े किए जा रहे हैं उसके बाद आयोग पर परफार्मेंस का आकलन कड़ाई से करने का दबाव भी बढ़ गया है।

आयोग अब केवल बिजली कंपनियों की रिपोर्ट के आधार पर ही परफार्मेंस का आकलन नहीं करेगा बल्कि जनसुनवाई में मिल रहे फीडबैक के आधार पर कं पनियों से सफाई मांगेगा और उसके बाद ही दरों के निर्धारण के बारे में अंतिम फैसला करेगा।

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