...तो CM के 'घर' से भी है बिजली गुल?
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प्रदेश में बिजली संकट की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कटौतीमुक्त घोषित मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गृह जनपद इटावा समेत वीवीआईपी इलाकों में भी तीन-चार घंटे की आपात कटौती की जा रही है।
जिसके बाद अब कहा जा रहा है कि प्रदेश के लोगों को बिजली संकट से अभी फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है। मांग में लगातार हो रही बढ़ोतरी से हालात संभाले नहीं संभल रहे हैं।
जहां एक तरफ बिजली की कमी बनी हुई है वहीं प्रचंड गर्मी के कारण ट्रांसफार्मर, केबिल व लाइनों की गड़बड़ियों के चलते बड़े पैमाने हो रहे लोकल फाल्ट की वजह से भी लोगों तक बिजली नहीं पहुंच पा रही है।
अतिरिक्त बिजली खरीदने के बावजूद पावर कार्पोरेशन लोगों को तय शिड्यूल के मुताबिक आपूर्ति नहीं कर पा रहा है।
एक दिन में बढ़ी 500 मेगावाट की मांग
भीषण गर्मी के चलते प्रदेशवासियों को फिलहाल बिजली संकट से निजात मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं। बिजली की मांग में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है।
जितनी अतिरिक्त बिजली का इंतजाम किया जा रहा है वह भी कम पड़ जा रही है। रविवार के मुकाबले सोमवार को बिजली की मांग में लगभग 500 मेगावाट की वृद्धि हो गई।
रविवार को मांग 12,800 मेगावाट के आसपास थी जो आज 13,300 मेगावाट से ऊपर पहुंच गई। हालांकि पावर कार्पोरेशन एनर्जी एक्सचेंज के साथ-साथ द्विपक्षीय समझौते के तहत भी बिजली खरीद रहा है लेकिन कमी बनी हुई है।
नियंत्रण कक्ष के अभियंताओं का कहना है कि पारा चढ़ने की वजह से सिर्फ एक दिन के भीतर मांग 288 मिलियन यूनिट से बढ़कर 292 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई है।
लोकल फाल्ट भी है समस्या
290 मिलियन यूनिट से ज्यादा बिजली की आपूर्ति भी की गई लेकिन बहुत सी जगहों पर लोकल फाल्ट के चलते बिजली नहीं पहुंच पा रही है।
केबिल फाल्ट के चलते आज राजधानी के गोमतीपार इलाके में काफी बड़े हिस्से में घंटों बिजली गुल रही। अन्य स्थानीय गड़बड़ियों के चलते भी तमाम मुहल्लों में बिजली की आंख-मिचौली जारी है।
हालांकि लोकल फाल्ट दुरुस्त कराकर आपूर्ति सामान्य कराने के लिए पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने इंतजाम किए भी हैं लेकिन बड़ी संख्या में हो रहे फाल्ट से ये इंतजाम भी कारगर साबित नहीं हो पा रहे हैं।
अभियंताओं के मुताबिक इटावा समेत वीवीआईपी जिलों में आज लगातार दूसरे भी आपात कटौती जारी रही। प्रदेश के अन्य जिलों भी बिजली की आवाजाही से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
जल आपूर्ति भी नहीं हो पा रही है
बिजली कटौती के चलते जलापूर्ति भी प्रभावित हो रही है। अभियंताओं का कहना है कि पारा गिरने या मानसून के आने के बाद ही बिजली संकट से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है क्योंकि वितरण और ट्रांसमिशन नेटवर्क भी गर्मी के चलते जवाब दे रहा है।
यह है गणित
प्राइम नंबर
बिजली की मांग---13,300 मेगावाट
उपलब्धता---12,200 मेगावाट
कमी---1100 मेगावाट
केंद्र से मदद की है उम्मीद
मामले पर ऊर्जा राज्यमंत्री यासर शाह का कहना है कि ‘बिजली आपूर्ति सामान्य रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार केंद्र से लगातार संपर्क बनाए हुए है।
वितरण एवं ट्रांसमिशन नेटवर्क में जहां कमियां हैं उसे ठीक कराया रहा है। ब्रेकडाउन को युद्धस्तर पर ठीक कराया जा रहा है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम को बिजलीघरों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
निदेशकों को बिजलीघरों में उत्पादन पर निगाह रखने को भेजा गया है। गर्मी ज्यादा है इसलिए समस्या है। कोशिश है कि यह कठिन समय ठीक-ठाक निकल जाए। बारिश हो जाए तो राहत मिल जाएगी।’