नहीं मिल पा रही मोदी के वाराणसी को 24 घंटे बिजली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भले ही अखिलेश सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को 24 घंटे बिजली देने का वादा किया हो लेकिन, वहां भी बिजली कटौती की जा रही है।
प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आदेश के बावजूद वाराणसी को बिजली न मिलने से प्रदेश के अन्य शहरों के हाल का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सूबे में बिजली संकट को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। प्रदेश में अब घोषित के बजाय अघोषित कटौती ज्यादा हो रही है। लोकल फॉल्ट के नाम पर घंटो बिजली गुल हो रही है।
बिजली की इस किल्लत से परेशान लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखने लगा है। जगह-जगह बिजली विभाग के कर्मचारियों से मारपीट की घटनाएं हो रही हैं।
हालात एकदम अलग
यूं तो पॉवर कार्पोरेशन के आंकड़ों को देखा जाए तो बिजली की मांग व आपूर्ति में मात्र 550 मेगावाट का ही अंतर है। जबकि स्थिति एकदम उलट है।
राजधानी लखनऊ में भी बिजली संकट चरम पर है। लोकल फॉल्ट के नाम पर घंटों बिजली गुल हो रही है। बुंदेलखंड इलाके का तो और भी बुरा हाल है।
वहां पर आधिकारिक रूप से नौ घंटे से अधिक की बिजली कटौती हो रही है। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में 12 घंटे से अधिक बिजली कटौती हो रही है।
बिजली विभाग के अनुसार तो महानगर में मात्र एक घंटे की ही कटौती हो रही है। जबकि लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, आगरा जैसे शहरों का बुरा हाल है।
शहरों का बुरा हाल
वाराणसी कटौती मुक्त होने के बावजूद वहां घंटों बिजली गुल हो रही है। अन्य शहरों का तो और भी बुरा हाल है।
उत्पादन के आंकड़े देखे जाएं तो उत्तर प्रदेश राजकीय विद्युत उत्पादन निगम की पांच इकाईयां (ओबरा, आनपारा, पनकी, हरदुआगंज व पारीक्षा) में 2905 मेगावाट का ही उत्पादन हुआ।
उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम व विष्णु प्रयाग जल विद्युत गृह से 637 मेगावाट बिजली ही मिल सकी।
इसी तरह केंद्रीय सेक्टर से भी यूपी को 6325 मेगावाट बिजली मिली। यह बिजली मांग की तुलना में काफी कम थी।
इटावा में भी कटौती
प्रदेश में सपा सरकार बनने के सवा दो साल बाद पहली बार इटावा में भी रविवार को करीब चार घंटे की बिजली कटौती की गई। उल्लेखनीय है कि इटावा को सपा का गढ़ माना जाता है।
हालांकि यह कटौती मौखिक आदेश पर ही की गई है। अधिकारी भी इसे कटौती का नाम देने के बजाय स्थानीय स्तर का फॉल्ट बता रहे हैं।
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक प्रभु नारायण सिंह कहते हैं कि उनकी जानकारी में इस तरह की कोई कटौती नहीं है।
अगर बिजली गई है तो दूसरे कारण हो सकते हैं। कटौती की सूचना कानपुर से कल रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी।
मांग और पूर्ति का अंतर
कुल मांग-12781 मेगावाट
कुल उपलब्धता-12231 मेगावाट
आपात कटौती-550 मेगावाट
बिजली कटौती पर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन का कहना है कि विद्युत आपूर्ति में लापरवाही भी हो रही है।
ऐसे कर्मियों व अभियंताओं को चिन्हित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बिजली आपूर्ति में किसी भी स्तर पर लापरवाही क्षम्य नहीं होगी।