झटकाः महंगी हुई बिजली, और बढ़ेगा संकट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लगातार पारा चढ़ने व उमस बढ़ने की वजह से प्रदेश में बिजली की मांग बढ़ती ही जा रही है। मांग और उपलब्धता में भारी अंतर बरकरार रहने से आपूर्ति व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है।
गांवों से लेकर शहरों तक अतिरिक्त आपात कटौती का सिलसिला जारी है। केंद्रीय और राज्य के बिजलीघरों से तो कम बिजली मिल ही रही है, एनर्जी एक्सचेंज में बिजली की कीमत 10 रुपये यूनिट तक पहुंच जाने के कारण भी पावर कॉर्पोरेशन के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
बृहस्पतिवार तक तो छह-सात रुपये यूनिट तक की बिजली खरीदकर शिड्यूल के हिसाब से आपूर्ति की कोशिश की जाती रही लेकिन शुक्रवार को एनर्जी एक्सचेंज से इस दर पर भी बिजली नहीं मिल पाई।
राज्य के ताप बिजलीघरों की इकाइयों को ज्यादा क्षमता पर चलाकर बिजली की कमी पूरी करने की कोशिश की जा रही लेकिन शिड्यूल के अनुसार आपूर्ति संभव नहीं हो पा रही है। मांग ज्यादा और बिजली की सीमित उपलब्धता को देखते हुए पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन आपूर्ति शिड्यूल में बदलाव के लिए माथापच्ची कर रहा है।
मिल रही 11,000-11,500 मेगावाट बिजली
केंद्र और राज्य के बिजलीघरों के बाद अब एनर्जी एक्सचेंज में बिजली की दरों में आए जबरदस्त उछाल ने पावर कॉर्पोरेशन की मुश्किलें बढ़ी दी हैं।
अभी तक दूसरे राज्यों से उधार तथा एनर्जी एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली का इंतजाम करके आपूर्ति पटरी पर रखने की कोशिश की जा रही थी लेकिन अब एक्सचेंज में बिजली की कीमत 10 रुपये यूनिट तक पहुंच जाने से इतनी महंगी बिजली खरीदना संभव नहीं हो पा रहा है।
हालांकि नियंत्रण कक्ष के अभियंता 11,000-11,500 मेगावाट बिजली की उपलब्धता का दावा कर रहे हैं लेकिन 1000-1500 मेगावाट की कमी बनी हुई है।
शुरू हो सकती हैं कुछ और इकाई
अभियंताओं का कहना है कि राज्य के बिजलीघरों का उत्पादन 2700 मेगावाट से ऊपर पहुंच गया है जबकि जल विद्युतगृहों से 700 मेगावाट से ज्यादा बिजली मिल रही है।
शुक्रवार को केंद्रीय कोटे में भी थोड़ी बढ़ोतरी हुई है। शनिवार तक केंद्रीय बिजलीघरों की कुछ और इकाइयों के चल जाने की उम्मीद है। इसके बाद आपूर्ति में थोड़ा-बहुत सुधार हो सकता है।
पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के अनुसार मौजूदा समय गांवों को लगभग छह घंटे, जिलों को 13 घंटे, मंडलों को 17 घंटे और महानगरों को 18 घंटे, बुंदेलखंड को 14 घंटे बिजली आपूर्ति हो पा रही है।
मुख्य सचिव ने किया बचाव
मुख्य सचिव आलोक रंजन का कहना है कि बिजली संकट केवल यूपी ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी है। एनटीपीसी की इकाइयां बंद हैं। कुछ निजी बिजलीघरों की इकाइयां भी बंद हैं। हिमाचल प्रदेश में जल विद्युतगृहों की इकाइयां बंद होने से भी 300 मेगावाट बिजली नहीं मिल पा रही है।
बिजलीघरों में कोयले की समस्या आ रही है। इसके लिए उन्होंने केंद्रीय कोयला सचिव को पत्र लिखा है। कोयला सचिव ने पत्र भेजकर और टेलीफोन पर प्रदेश के बिजलीघरों को कोयले की आपूर्ति जल्द से जल्द सामान्य करने का भरोसा दिलाया है।
कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकार वार्ता में सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि केंद्र ने यूपी को प्राथमिकता के आधार पर कोयला उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है ताकि इकाइयां पूरी क्षमता से चल सकें।
उन्होंने बताया कि आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जहां से उपलब्ध हो पा रही है, बिजली खरीदी जा रही है। जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाने की उम्मीद है।