फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   power becomes costly

झटकाः महंगी हुई बिजली, और बढ़ेगा संकट

Fri, 22 Aug 2014 11:11 PM IST
अनिल श्रीवास्तव/ अमर उजाला, लखनऊ
अनिल श्रीवास्तव/ अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 22 Aug 2014 11:11 PM IST
विज्ञापन
power becomes costly

लगातार पारा चढ़ने व उमस बढ़ने की वजह से प्रदेश में बिजली की मांग बढ़ती ही जा रही है। मांग और उपलब्धता में भारी अंतर बरकरार रहने से आपूर्ति व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है।

विज्ञापन


गांवों से लेकर शहरों तक अतिरिक्त आपात कटौती का सिलसिला जारी है। केंद्रीय और राज्य के बिजलीघरों से तो कम बिजली मिल ही रही है, एनर्जी एक्सचेंज में बिजली की कीमत 10 रुपये यूनिट तक पहुंच जाने के कारण भी पावर कॉर्पोरेशन के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
विज्ञापन


बृहस्पतिवार तक तो छह-सात रुपये यूनिट तक की बिजली खरीदकर शिड्यूल के  हिसाब से आपूर्ति की कोशिश की जाती रही लेकिन शुक्रवार को एनर्जी एक्सचेंज से इस दर पर भी बिजली नहीं मिल पाई।
विज्ञापन
विज्ञापन


राज्य के ताप बिजलीघरों की इकाइयों को ज्यादा क्षमता पर चलाकर बिजली की कमी पूरी करने की कोशिश की जा रही लेकिन शिड्यूल के अनुसार आपूर्ति संभव नहीं हो पा रही है। मांग ज्यादा और बिजली की सीमित उपलब्धता को देखते हुए पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन आपूर्ति शिड्यूल में बदलाव के लिए माथापच्ची कर रहा है।

मिल रही 11,000-11,500 मेगावाट बिजली

power becomes costly

केंद्र और राज्य के बिजलीघरों के बाद अब एनर्जी एक्सचेंज में बिजली की दरों में आए जबरदस्त उछाल ने पावर कॉर्पोरेशन की मुश्किलें बढ़ी दी हैं।

अभी तक दूसरे राज्यों से उधार तथा एनर्जी एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली का इंतजाम करके आपूर्ति पटरी पर रखने की कोशिश की जा रही थी लेकिन अब एक्सचेंज में बिजली की कीमत 10 रुपये यूनिट तक पहुंच जाने से इतनी महंगी बिजली खरीदना संभव नहीं हो पा रहा है।

हालांकि नियंत्रण कक्ष के अभियंता 11,000-11,500 मेगावाट बिजली की उपलब्धता का दावा कर रहे हैं लेकिन 1000-1500 मेगावाट की कमी बनी हुई है।

शुरू हो सकती हैं कुछ और इकाई

power becomes costly

अभियंताओं का कहना है कि राज्य के बिजलीघरों का उत्पादन 2700 मेगावाट से ऊपर पहुंच गया है जबकि जल विद्युतगृहों से 700 मेगावाट से ज्यादा बिजली मिल रही है।

शुक्रवार को केंद्रीय कोटे में भी थोड़ी बढ़ोतरी हुई है। शनिवार तक केंद्रीय बिजलीघरों की कुछ और इकाइयों के चल जाने की उम्मीद है। इसके बाद आपूर्ति में थोड़ा-बहुत सुधार हो सकता है।

पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के अनुसार मौजूदा समय गांवों को लगभग छह घंटे, जिलों को 13 घंटे, मंडलों को 17 घंटे और महानगरों को 18 घंटे, बुंदेलखंड को 14 घंटे बिजली आपूर्ति हो पा रही है।

मुख्य सचिव ने किया बचाव

power becomes costly

मुख्य सचिव आलोक रंजन का कहना है कि बिजली संकट केवल यूपी ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी है। एनटीपीसी की इकाइयां बंद हैं। कुछ निजी बिजलीघरों की इकाइयां भी बंद हैं। हिमाचल प्रदेश में जल विद्युतगृहों की इकाइयां बंद होने से भी 300 मेगावाट बिजली नहीं मिल पा रही है।

बिजलीघरों में कोयले की समस्या आ रही है। इसके लिए उन्होंने केंद्रीय कोयला सचिव को पत्र लिखा है। कोयला सचिव ने पत्र भेजकर और टेलीफोन पर प्रदेश के  बिजलीघरों को कोयले की आपूर्ति जल्द से जल्द सामान्य करने का भरोसा दिलाया है।

कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकार वार्ता में सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि केंद्र ने यूपी को प्राथमिकता के आधार पर कोयला उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है ताकि इकाइयां पूरी क्षमता से चल सकें।

उन्होंने बताया कि आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने के  लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जहां से उपलब्ध हो पा रही है, बिजली खरीदी जा रही है। जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाने की उम्मीद है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed