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डाकघर गबन : ग्राहकों के 60 लाख हड़पने वाले दो और आरोपी गिरफ्तार
Sat, 10 May 2025 01:52 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sat, 10 May 2025 01:52 AM IST
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डाकघर गबन : ग्राहकों के 60 लाख हड़पने वाले दो और आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ। महानगर स्थित आरपी लाइन उपडाकघर में सामने आए 60 लाख रुपये के गबन में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में उन्नाव के हसनगंज का रहने वाला सतगुरु शरण और बीकेटी निवासी आनंद सिंह है। इससे पहले पुलिस तत्कालीन उप डाकपाल नीरज सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है, जो मामले का मुख्य आरोपी है।
इंस्पेक्टर महानगर अखिलेश मिश्र के अनुसार, 12 अप्रैल 2023 को सहायक अधीक्षक डाकघर, राजेंद्र सिंह की तहरीर पर नीरज सिंह के खिलाफ 60 लाख रुपये गबन का मामला दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि आरोपी ग्राहकों से जमा के नाम पर नकद रुपये लेकर उन्हें फर्जी रसीदें दे देते थे। मामले की जांच आगे बढ़ रही है और अन्य संलिप्त लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
सर्वर डाउन बताकर करते थे पासबुक एंट्री में देरी
सतगुरु शरण, जो 1993 से आरपी लाइन डाकघर में नियुक्त था, नीरज सिंह के साथ मिलकर खाताधारकों को फर्जी रसीद देकर बहानेबाजी करता था। सर्वर डाउन होने का हवाला देकर पासबुक में बाद में एंट्री की बात कहता था, जिससे ग्राहकों को संदेह न हो।
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आरोपी आनंद सिंह की भूमिका
जांच में यह भी पाया गया कि जुलाई 2016 से संविदा पर नियुक्त आनंद सिंह के बचत खाते में 17 मार्च 2022 से 3 फरवरी 2023 तक बार-बार धनराशि भेजी गई। बाद में वह धनराशि नीरज सिंह के खाते में ट्रांसफर कर देता था। दोनों की जान-पहचान नीरज के बीकेटी डाकघर में 2016-2021 के कार्यकाल के दौरान हुई थी।
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इंस्पेक्टर महानगर अखिलेश मिश्र के अनुसार, 12 अप्रैल 2023 को सहायक अधीक्षक डाकघर, राजेंद्र सिंह की तहरीर पर नीरज सिंह के खिलाफ 60 लाख रुपये गबन का मामला दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि आरोपी ग्राहकों से जमा के नाम पर नकद रुपये लेकर उन्हें फर्जी रसीदें दे देते थे। मामले की जांच आगे बढ़ रही है और अन्य संलिप्त लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
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सर्वर डाउन बताकर करते थे पासबुक एंट्री में देरी
सतगुरु शरण, जो 1993 से आरपी लाइन डाकघर में नियुक्त था, नीरज सिंह के साथ मिलकर खाताधारकों को फर्जी रसीद देकर बहानेबाजी करता था। सर्वर डाउन होने का हवाला देकर पासबुक में बाद में एंट्री की बात कहता था, जिससे ग्राहकों को संदेह न हो।
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आरोपी आनंद सिंह की भूमिका
जांच में यह भी पाया गया कि जुलाई 2016 से संविदा पर नियुक्त आनंद सिंह के बचत खाते में 17 मार्च 2022 से 3 फरवरी 2023 तक बार-बार धनराशि भेजी गई। बाद में वह धनराशि नीरज सिंह के खाते में ट्रांसफर कर देता था। दोनों की जान-पहचान नीरज के बीकेटी डाकघर में 2016-2021 के कार्यकाल के दौरान हुई थी।