माफिया के शरीर को छेदकर निकल गई गोलियां, बेहद नजदीक से की गई फायरिंग, पीएम रिपोर्ट में खुलासा
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माफिया मुन्ना बजरंगी पर बागपत जेल में गोलियां बरसाई गई। फोरेंसिक टीम ने मौके से 10 खोखे बरामद किए हैं, लेकिन शरीर में एक भी गोली नहीं मिली। एक्स-रे में सिर्फ 20 साल पुरानी मुठभेड़ की एक गोली ही ट्रेस हो पाई। पिस्टल से गोली नजदीक से मारी गई, इस कारण सभी गोलियां शरीर को छेदते हुए पार निकल गई।
मुन्ना बजरंगी और मौत का यह पहली बार सामना नहीं हुआ। इसी साल मार्च 2018 में झांसी जेल में एसटीएफ के एक दरोगा पर बंदी के माध्यम से जहर देकर मारने के प्रयास का आरोप भी बजरंगी ने लगाया था। मामले की जांच चल रही है। इससे पहले 1998 में करनाल हाइवे पर पुलिस के साथ एनकाउंटर हुआ। बजरंगी को आठ गोलियां लगी थी। पुलिस उसे अस्पताल में भर्ती कराने के बजाय मोर्चरी पर ले गई थी, जबकि वह जिंदा था।
चिकित्सकों ने शरीर से सात गोलियां तो निकाल दी थी, लेकिन एक गोली उसके पेट में फंसी हुई है। हत्या के बाद पोस्टमार्टम हुआ तो तीन डॉक्टरों के पैनल को एक भी गोली उसके शरीर में नहीं मिली। सिर्फ 20 साल पुराने एनकाउंटर की गोली ही लगी मिली। उधर, एसपी जयप्रकाश का कहना है कि फोरेंसिक टीम ने 10 खोखे बरामद कर लिए हैं। सभी बिंदुओं पर जांच चल रही है।
विदेशी पिस्टल से तो नहीं चलाई गोलियां
सुनील राठी ने पिस्टल को जेल के गटर में फेंक दिया। गटर में अग्रवाल मंडी टटीरी के सफाई कर्मचारी जुटे हैं, लेकिन देर शाम तक पिस्टल बरामद नहीं हुआ है। अंदेशा है कि विदेशी पिस्टल से गोली चलाई गई है। यह भी माना जा रहा है कि राठी के साथ वारदात के साथ कोई उसका साथी जरूर मौजूद रहा होगा।