माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने का सपना लेकर निकली लखनऊ की बेटी पूर्वा
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माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने का सपना संजोकर लखनऊ की पूर्वा धवन एवरेस्ट बेस कैंप तक ट्रेकिंग करने जा रही हैं। उनके इस साहसिक कार्य के लिए माउंट एवरेस्ट फतह कर चुकीं अरुणिमा सिन्हा ने फ्लैग ऑफ कर शुभकामनाएं दी हैं।
अरुणिमा सिन्हा को अपना प्रेरणस्रोत मानने वाली 20 वर्षीय पूर्वा, 20 दिसंबर को लखनऊ से काठमांडू के लिए रवाना होंगी। वहां से 23 दिसंबर को हेलीकॉप्टर से लुकला जाएंगी, जहां से 24 दिसंबर को एवरेस्ट के बेस कैंप के लिए ट्रेकिंग शुरू होगी। उनकी टीम का निर्देशन नेपाल की थेलोपिया टीम करेगी। अमर उजाला से विशेष बातचीत में पूर्वा ने बताया कि ठंड में माउंट एवरेस्ट का तापमान -25 डिग्री से भी नीचे चला जाता है।
उत्तरकाशी स्थित नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग से बेसिक और एडवांस माउंटेनियरिंग की शिक्षा ले चुकीं पूर्वा ने 16000 फीट ऊंची डोरियानी बामक ग्लेशियर को फतह किया है।
तीन बार सर्जरी के बाद सीधी हुई गर्दन
इंदिरा नगर निवासी पूर्वा ने सपना तो देखा लेकिन उसे पूरा करने के रास्ते में अड़ंगे भी बहुत आए। जन्म से ही उनकी गर्दन बाईं ओर कंधे की तरफ झुकी और सटी थी। 18 साल की उम्र तक उन्हें तीन बार सर्जरी करवानी पड़ी, जिसके बाद गर्दन सीधी हुई। इस वजह से कई बार वह मायूस तो हुईं लेकिन हिम्मत नहीं हारी। 2015 में सर्जरी पूरी तरह सफल होने के बाद वह अरुणिमा सिन्हा से मिलीं और फिर एवरेस्ट फतह करने का सफर शुरू हो गया। एवरेस्ट फतह की ओर यह उनका पहला कदम होगा।
मेरी और अरुमिणा मैम दोनों की फैमिली का मिला सपोर्ट
पूर्वा कहती हैं कि उनके पिता अभय कुमार धवन बिजनेसमैन हैं। कई साल पहले वह अपने तीन दोस्तों के साथ खरदुंगला पास तक गए थे। उनकी इसी कामयाबी के बाद से पूर्वा ने माउंट एवरेस्ट फतह करने की ठान ली। वह कहती हैं कि उनके सपने को साकार करने में परिवार वालों ने हमेशा उनका साथा दिया और हौसला बढ़ाया।
जब वह अरुणिमा और उनके परिवार से मिलीं तो वहां से भी भरपूर सहयोग मिला। पूर्वा ने बताया कि अरुणिमा मैम ने ही मुझे पर्वत पर चढ़ने के दौरान आने वाली कठिनाइयों और चुनौतियों की बारिकियां बताई।