लखनऊ में इस तारीख से पॉलीथिन पर प्रतिबंध, वसूला जाएगा जुर्माना
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राजधानी में 21 जनवरी पॉलीथिन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाएगा। जिला प्रशासन और नगर निगम फरवरी तक अभियान चलाकर पॉलीथिन जब्त करेंगे। मार्च से पॉलीथिन का उपयोग करते पाए जाने पर जुर्माना वसूला जाएगा।
यह जुर्माना भी हर महीने 500 रुपये बढ़ता जाएगा। दिसंबर 2016 के बाद जुर्माना की धनराशि पांच हजार रुपये होगी। यह कार्रवाई नगर निगम अनाशित कूड़ा-कचरा नियम-2000 के तहत की जाएगी।
शहर को पॉलीथिन मुक्त बनाने के लिए यह योजना सोमवार को डीएम राजशेखर ने व्यापारी संगठन, संबंधित विभागों के अधिकारियों और यूपी प्लास्टिक प्रोडक्ट्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ एक संयुक्त बैठक में तैयार की।
इसकी जिम्मेदारी आठ विभागों के जिम्मे होगी। बैठक में बनी योजना के मुताबिक पूरे शहर को चार जोन में बांटा गया है। इन चारों जोन में एक-एक टीम काम करेगी। प्रत्येक टीम में दो विभागों के प्रतिनिधि के अलावा नगर निगम, पुलिस भी मौजूद रहेगी।
जब्ती अभियान के साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए भी अभियान चलेगा। इस कार्रवाई में उपयोग के साथ प्रोडक्शन और बाहर से आयात होकर आने वाली पॉलीथिन के भंडारण को भी शामिल किया गया है। बैठक में यूपीपीसीबी, नगर निगम, एलडीए, व्यापार मंडल के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
पॉलीथिन प्रतिबंध के बाद सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों को नगर निगम से एक प्रमाणपत्र लेना होगा। इसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वह अब पॉलीथिन कैरीबैग का उपयोग नहीं कर रहे हैं। सभी अस्पतालों को भी एक स्व-घोषित पत्र सीएमओ को देना होगा, जिसमें पॉलीथिन उपयोग प्रतिबंधित कर दिए जाने की जानकारी देनी होगी।
इसका सत्यापन भी सीएमओ और यूपीपीसीबी औचक निरीक्षण कर कराएंगे। डीएम राजशेखर ने बताया कि पॉलीथिन का भंडारण और प्रोडक्शन करने को प्रतिबंध का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण कानून, 1986 में प्रदत्त अधिकारों और सजा के प्रावधान के साथ कार्रवाई की जाएगी। इसमें एक साल की जेल या पांच लाख तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यह सख्ती आने वाली पीढ़ी के भविष्य को देखते हुए की जाएगी।
किसकी क्या होगी जिम्मेदारी
नगर निगम : होटल, मॉल, गेस्टहाउस, रेस्त्रां, मैरिज होम में प्रतिबंध को लागू कराना। सभी प्रतिष्ठान को प्रमाणपत्र बनाकर देना और समय-समय पर इसकी जांच कराना।
मंडल रेल प्रबंधक : रेलवे स्टेशन पर पॉलीथिन का उपयोग बंद कराना। आरपीएफ और जीआरपी को जरूरी निर्देश देकर कार्रवाई कराना। पार्किंग स्थल और मुख्य परिसर में प्रतिबंध के बोर्ड प्रदर्शित करना।
परिवहन निगम : बस अड्डे पर प्रतिबंध के साथ यात्रियों को जागरूक करना। स्थानीय पुलिस की मदद से चेकिंग अभियान चलाकर पॉलीथिन को जब्त कराना होगा।
एयरपोर्ट अथॉरिटी : आमौसी एयरपोर्ट पर किसी तरह की पॉलीथिन का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। एयरपोर्ट पर मौजूद सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस चेकिंग अभियान चलाकर इसे सुनिश्चित करेंगे।
श्रम विभाग : औद्योगिक संस्थाओं में पॉलीथिन के उपयोग को बंद कराना होगा। प्राधिकृत अधिकारी और पुलिस की मदद ली जा सकती है। सभी औद्योगिक परिसर में प्रतिबंध की सूचना का बोर्ड प्रदर्शित करना होगा।
विपणन एवं आपूर्ति कार्यालय : सभी स्टॉकिस्ट, डिस्ट्रीब्यूटर्स, खुदरा विक्रेताओं की सूची तैयार कर कार्रवाई करनी होगी। प्रतिबंध का नियम तोड़ने पर स्टॉक जब्त करते हुए स्थानीय पुलिस को सौंप दिया जाएगा।
चिकित्सा विभाग : सभी चिकित्सा संस्थानों में कैरीबैग को प्रतिबंधित कराना होगा। इसके लिए जरूरी बोर्ड लगाए जाने और इसका सत्यापन कराने के बाद रिपोर्ट यूपीपीसीबी को भेजनी होगी। हॉस्पिटल भी एक स्वघोषित पत्र सीएमओ को देंगे। औचक निरीक्षण भी चिकित्सा विभाग कराएगा।