मोदी के गांव जयापुर में विकास पर मची मारामारी!
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पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही जयापुर गांव में अंदरूनी राजनीति तेज हो गई है। विकास कार्यों का श्रेय लेने की भी होड़ है। हालांकि गांव के बुजुर्गों का मानना है कि जब दुनिया भर के लोगों की नजर इस गांव पर है तो हमें भी अपनी गंवई सोच और व्यवहार से ऊपर उठकर उदार होकर सोचना होगा और अपने कार्य व्यवहार में बदलाव लाना होगा। तभी यह गांव दूसरों के लिए आदर्श बन पाएगा।
रहा सवाल गांव में हो रहे विकास कार्यों का श्रेय लेने की मची होड़ का तो सोमवार को इसकी बानगी देखने को मिली। गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए बोरिंग होनी है। मगर गांव के लोग बोरिंग के लिए इंच भर भी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं दिखे।
बोरिंग कहां होगी और कितनी जमीन पर होगी इसे लेकर घंटे भर जिच हुई। आखिरकार सुलह-समझौते के लिए स्थानीय तहसीलदार को मौके पर आना पड़ा।
लेखपाल और कानूनगो की मौजूदगी में जमीन की दोबारा नाप-जोख हुई। तब जाकर मामला सुलझा और बोरिंग का काम शुरू हो सका। पूरी जिच केवल इसलिए हुई कि इस अच्छे काम का श्रेय अकेले प्रधान के खाते में न चला जाए।
ग्रामसभा की जमीनों पर जमा रखा है कब्जा
गांव के ही एक बुजुर्ग कैलाश कहते हैं, विकास सबको चाहिए। सब चाहते हैं उनके घर तक पक्की सड़क हो, 24 घंटे बिजली और पानी मिले। अस्पताल बने, स्कूल बने मगर इसके लिए इंच भर भी जमीन देने को तैयार नहीं। ऐसा कैसे होगा। कुछ पाना है तो कुछ तो खोना ही होगा। यही दस्तूर भी है।
वहीं एक अन्य बुजुर्ग ने कहा कि गांव में जमीन की कोई कमी नहीं। बहुत लोगों ने ग्राम सभा की जमीन पर कब्जा जमा रखा है। लेखपाल को चाहिए कि पूरे गांव का नए सिरे से सीमांकन करें और सबकी पैमाइश करें। तय मानिए गांव के अंदर ही इतनी जमीन निकलेगी कि स्कूल, अस्पताल, खेल मैदान सब बन जाएगा।
युवा राहुल पटेल कहते हैं, जयापुर में विकास की तमाम योजनाएं इसलिए चल रही हैं कि क्योंकि इस गांव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया है। मोदी चाहते हैं कि जयापुर विकास के पैमाने पर देश का मॉडल गांव बने मगर कुछ लोग हैं कि हर अच्छे काम को राजनीति के चश्मे से देख रहे हैं। यह अच्छी बात नहीं। कम से कम पीएम की भावना का तो गांव के हरेक शख्स को सम्मान करना चाहिए।
इस पर जयापुर के प्रधान प्रतिनिधि नारायण पटेल कहते हैं कि गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए चार स्थानों पर बोरिंग होनी है। कल से जहां बोरिंग का काम शुरू होगा, वह कुम्हारों की जमीन है। जमीन को लेकर विवाद की स्थिति थी। मगर तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल की मौजूदगी में हुई जमीन की नापजोख में विवाद का निबटारा हो गया है।