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बिल्ली के भाग से टूटा छींका...
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 21 Jun 2014 10:52 AM IST
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शासन में एक अफसर हैं जो काफी दिनों से प्राइम पोस्टिंग के लिए परेशान थे। वे अरसे से साइडलाइन चल रहे थे।
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यूं तो उनके पास आधी आबादी के कल्याण की जिम्मेदारी थी। बेचारे काफी दिनों से झेंपते हुए किसी तरह काम किए जा रहे थे। वहीं, पंचम तल में अच्छी पोस्टिंग के लिए जुगाड़ भी लगा रहे थे।
जब दाल नहीं गली तो मन मारकर उसी विभाग में काम करने लगे। इसी बीच उनका एक्सीडेंट हो गया और पैर तुड़वा बैठे। प्लास्टर बंधवाकर घर में आराम करने लगे। घर में बैठे-बैठे अपने बुरे समय को कोस रहे थे।
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इसी बीच उनके तबादले की सूचना आ गई। तबादला भी ऐसा हुआ कि जिले के अधिकारी ही बन गए। फिर क्या था पैर की चोट भूलकर रात में ही सबसे पहले डॉक्टर के पास गए और प्लास्टर कटवा आए।
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अगले दिन सुबह ही उस जिले में पहुंच गए, जहां का उन्हें चार्ज दिया गया था। उनके एक खास मित्र उनकी इस हालत पर चुटकी लेने से नहीं चूके। बोले- भइया इसी को कहते हैं बिल्ली के भाग से छींका टूटना...।