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मथुरा ऑपरेशन पर इन सवालों के जवाब नहीं दे पा रही है पुलिस
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Wed, 08 Jun 2016 01:33 PM IST
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मथुरा में जवाहर बाग को खाली कराने के लिए तत्कालीन एसएसपी राकेश सिंह ने रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की मांग की थी। यह मांग 31 मई को प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पंडा और डीजीपी जावीद अहमद से हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में की गई थी।
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इस पर डीजीपी ने आरएएफ उपलब्ध कराने की सहमति दी थी। यही नहीं, दो कंपनी महिला पुलिस बल की भी मांग हुई थी। इसके बावजूद दो जून को बगैर आरएएफ वहां ऑपरेशन शुरू हो गया।
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बता दें, हाईकोर्ट के फैसले के बाद शासन के अधिकारी जवाहर बाग खाली कराने की योजना में जुट गए थे। इस दौरान प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पंडा व डीजीपी जावीद अहमद ने मथुरा के अफसरों से तीन बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की।
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आखिरी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग 31 मई को हुई। इसमें एसएसपी ने एक जून को ही ऑपरेशन शुरू करने की बात कही थी। जबकि आगरा के कमिश्नर ऑपरेशन तीन/चार जून की सुबह चार बजे शुरू कराना चाहते थे।
इसके बावजूद ऑपरेशन अचानक दो जून की शाम में शुरू कर दिया गया। इस पर डीजीपी जावीद अहमद यह कहते हैं कि दो जून को पुलिस रेकी करने गई थी।
लिहाजा यह सवाल उठता है कि क्या रेकी करने पुलिस फुल ड्रेस में सभी को बताने के बाद जाती है। जब रेकी करने पुलिस गई तो उसने जवाहर बाग की दीवार क्यों तोड़ी? यह ऐसे प्रश्न हैं जिसका जवाब देने से पुलिस के आला अधिकारी बच रहे हैं।
फुलप्रूफ तैयारी के साथ शुरू करने के दिए थे निर्देश
डेमो
गत 31 मई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में 17 बिंदुओं पर कार्ययोजना बनी थी। ऑपरेशन को फुलप्रूफ तैयारी के साथ शुरू करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अचानक हुए इस ऑपरेशन के कारण सारी तैयारियां धरी रह गईं।
इसमें कहा गया था कि पुलिस के पास सुरक्षा के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहेंगे। एंटी रायट्स प्रोटेक्शन इक्विपमेंट उपलब्ध कराने की भी बात कही गई थी।
हवाई फायर व रबर बुलेट का प्रयोग करने, ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल और ऑपरेशन में मीडिया को साथ लेने जाने और एंबुलेंस व अस्पतालों में समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे।
यही नहीं, बाग में जो लोग हैं, उन्हें मारना नहीं बल्कि बाहर निकालकर बाग खाली कराना है। यह भी तय हुआ था कि फोर्स की प्रत्येक टुकड़ी के साथ मजिस्ट्रेट उपलब्ध रहेंगे।
यह भी कहा गया कि यदि जरूरी हो तो माउंटेड पुलिस को भी साथ रखा जाए। ऐसे में जब इतनी तैयारी के साथ ऑपरेशन शुरू करने की बात थी तो फिर यह ऑपरेशन तय समय से पहले किसने शुरू करने के आदेश दिए। यह अब जांच का विषय है।
इसमें कहा गया था कि पुलिस के पास सुरक्षा के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहेंगे। एंटी रायट्स प्रोटेक्शन इक्विपमेंट उपलब्ध कराने की भी बात कही गई थी।
हवाई फायर व रबर बुलेट का प्रयोग करने, ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल और ऑपरेशन में मीडिया को साथ लेने जाने और एंबुलेंस व अस्पतालों में समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे।
यही नहीं, बाग में जो लोग हैं, उन्हें मारना नहीं बल्कि बाहर निकालकर बाग खाली कराना है। यह भी तय हुआ था कि फोर्स की प्रत्येक टुकड़ी के साथ मजिस्ट्रेट उपलब्ध रहेंगे।
यह भी कहा गया कि यदि जरूरी हो तो माउंटेड पुलिस को भी साथ रखा जाए। ऐसे में जब इतनी तैयारी के साथ ऑपरेशन शुरू करने की बात थी तो फिर यह ऑपरेशन तय समय से पहले किसने शुरू करने के आदेश दिए। यह अब जांच का विषय है।