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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Policemen asked for mercy in pilibhit fake encounter case.

सजा सुनते ही दोषी पुलिसकर्मियों की हवाइयां उड़ी, मांगी रहम की भीख

Tue, 05 Apr 2016 05:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 05 Apr 2016 05:45 PM IST
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Policemen asked for mercy in pilibhit fake encounter case.
सजा के बाद जेल भेजे गए आरोपी - फोटो : amar ujala

पीलीभीत में फर्जी एनकाउंटर करने वाले पुलिसकर्मियों ने महज चार घंटे में 25 साल के इंतजार का दर्द महसूस कर लिया। दोषी तो वे पहले ही साबित हो चुके थे। सोमवार को सिर्फ यह तय होना था कि उन्हें कैसी सजा दी जाए। फांसी पर लटकाया जाए या उम्र भर सलाखों की कैद में डाल दिया जाए।

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कोर्ट रूम के कठघरे में खड़े पुलिसकर्मियों की धड़कनें भी बढ़ी हुई थीं। पत्नी, भाई, बेटे और रिश्तेदारों से घिरे पुलिसकर्मियों के चेहरों पर सजा का खौफ साफ दिख रहा था। पूरे समय वह पानी पीते और पसीना पोंछते रहे। उनकी यह हालत देखकर अपनों की मौत का हिसाब ढूंढ रहे लोगों के चेहरों पर सुकून दिखा।
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ढाई दशक पुराने मुकदमे में सजा मुकर्रर किए जाने के चलते सुबह से ही कलेक्ट्रेट परिसर स्थित सीबीआई कोर्ट में गहमागहमी थी। गलियारे में तिल रखने तक की जगह नहीं थी। कठघरे में खड़े पुलिसकर्मियों को एक-एक पल भारी लग रहा था।

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परिवारीजनों ने बहुत जिद की तो खीरा और केले खाए

Policemen asked for mercy in pilibhit fake encounter case.
पुलिस वैन में जाते आरोपी - फोटो : amar ujala

दोपहर करीब साढे़ बारह बजे पीड़ित पक्ष के वकील ने कोर्ट को पूरा मामला बताया। इसके बाद पौने एक बजे न्यायाधीश लंच के बाद सजा सुनाने की बात कहते हुए उठ गए।

उनके जाते ही सजा पाए पुलिसकर्मियों के रिश्तेदार और परिचित कोर्ट रूम में आ गए। हाथ पकड़कर उन्हें ढांढस बंधाया। खाना खिलाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। फैसले के इंतजार में उनके दिल की धड़कनें बढ़ गई थीं। इंतजार भारी पड़ रहा था। भूख मर चुकी थी। परिवारीजनों ने बहुत जिद की तो खीरा और केले खाए।

सभी पुलिसकर्मी जानते थे कि उम्रकैद की सजा तो होगी ही। अपने वकीलों और परिवार के सदस्यों से आगे की कार्रवाई पर चर्चा करते रहे। ठीक सवा चार बजे न्यायाधीश कोर्ट पहुंचे तो सन्नाटा छा गया। न्यायाधीश ने सजा सुनाई तो जुर्माने की रकम सुनकर पुलिसकर्मियों के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं।

साहब! बूढ़े-बीमार हैं, रहम करें

Policemen asked for mercy in pilibhit fake encounter case.
सजा सुनाए जाने के बाद परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया - फोटो : amar ujala

रिटायर्ड डिप्टी एसपी विजेंदर सिंह और सब इंस्पेक्टर सत्यपाल सिंह ने न्यायाधीश के समक्ष हाथ जोड़कर रहम की भीख मांगी। पहले दोनों ने खुद के निर्दोष होने की बात कही। अपनी बात रखते-रखते दोनों न्यायाधीश से तर्क करने लगे, जिस पर कोर्ट का माहौल गरम हो गया।

वहां मौजूद वकीलों ने कहा कि आप लोग दोषी साबित हो चुके हैं, अब तर्क से कोई फायदा नहीं। इस पर दोनों ने न्यायाधीश के हाथ जोड़ते हुए कहा कि, साहब हममें से ज्यादातर बूढ़े और बीमार हैं। हमने जो भी किया वह अधिकारियों के आदेश पर किया। हम पर रहम करें और कम से कम सजा दें।

पुलिसवालों के बच्चे भी देखें, उनके पिता ने क्या किया था
बलविंदरजीत कौर ने कहा कि अदालत को सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए। मेरा बेटा अपने पिता का मुंह नहीं देख सका। उसे जिंदगी भर इस बात का दुख रहता है कि पिता को आतंकवादी बता दिया। स्कूल से लेकर मोहल्ले तक हर जगह उसे लोग घूरते थे। अब जरा इन पुलिसवालों के बच्चों को भी तो पता चले कि उनके पिता ने क्या किया था। वह उन्हें जेल में देखेंगे, तभी कलेजे को ठंडक मिलेगी।

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